भारत में एविएशन फ्यूल की डिमांड साल 2031 तक **277,000 बैरल प्रति दिन** तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2024 के मुकाबले **44%** ज्यादा है। सरकार ने डिकार्बोनाइजेशन के लिए 2027 से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का अनिवार्य ब्लेंडिंग टारगेट तय किया है, जिसका सीधा असर एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
भारत के एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी है। साल 2024 में जेट फ्यूल की मांग लगभग 192,000 बैरल प्रति दिन थी, जो 2031 तक बढ़कर 277,000 बैरल प्रति दिन हो जाने का अनुमान है। इस ग्रोथ के पीछे मिडिल क्लास की बढ़ती रफ्तार, एयरलाइंस के बेड़े का विस्तार और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नोएडा के जेवर एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हैं।
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का नया रोडमैप
ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार का SAF ब्लेंडिंग मैंडेट एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। साल 2027 में 1% ब्लेंडिंग के साथ शुरुआत होगी, जिसे 2028 में बढ़ाकर 2% और 2030 तक 5% के स्तर पर ले जाया जाएगा। अनुमान है कि SAF की मांग 2027 के 46,000 टन से बढ़कर 2030 तक 250,000 टन हो जाएगी।
रिफाइनर्स और एयरलाइंस पर क्या होगा असर?
Indian Oil, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और Reliance Industries जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी। इन्हें अपनी रिफाइनरी प्रोसेस में बदलाव करना होगा ताकि ब्लेंडिंग टारगेट पूरे किए जा सकें। वहीं, दूसरी ओर एयरलाइंस के लिए चुनौती यह है कि SAF पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल के मुकाबले काफी महंगा है। इससे एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च बढ़ सकते हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनियां इस लागत को खुद संभालेंगी या टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी करके इसे ग्राहकों पर डालेंगी।
लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी बरकरार
साल 2026 के मध्य में मांग में आई हल्की सुस्ती (लगभग 180,000 बैरल प्रति दिन) सिर्फ एक साइक्लिकल (Cyclical) गिरावट थी। सरकारी उड़ान योजना (UDAN) के दम पर सेक्टर में स्ट्रक्चरल ग्रोथ की कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर यह होगा कि रिफाइनरीज कितनी तेजी से 5% के ब्लेंडिंग टारगेट को हासिल कर पाती हैं।
