Power Crisis: देश में बिजली की भारी किल्लत, सरकार ने लागू किया इमरजेंसी सेक्शन 11

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AuthorMehul Desai|Published at:
Power Crisis: देश में बिजली की भारी किल्लत, सरकार ने लागू किया इमरजेंसी सेक्शन 11

सितंबर में बिजली की मांग **269 GW** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। ग्रिड पर बढ़ते दबाव और कोयले की किल्लत को देखते हुए सरकार ने **31 दिसंबर, 2026** तक इमरजेंसी नियम लागू कर दिए हैं, जिससे कैप्टिव पावर प्लांट्स को फुल कैपेसिटी पर चलाना अनिवार्य हो गया है।

भारत में बिजली की मांग ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सितंबर 2026 में पीक डिमांड 269 GW तक पहुंच गई, जो मई के 270.8 GW के ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब है। नेशनल ग्रिड को अस्थिर होने से बचाने के लिए सरकार ने Electricity Act के सेक्शन 11 का इस्तेमाल किया है। इसके तहत 112 कैप्टिव थर्मल पावर प्लांट्स को 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन करना होगा।

संकट की जड़ें: हाइड्रो पावर और कोयला

इस संकट की मुख्य वजह सप्लाई साइड की मुश्किलें हैं। मॉनसून के अनिश्चित पैटर्न के चलते हाइड्रो पावर जनरेशन में चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में करीब 12% की गिरावट आई है। दूसरी ओर, कोयले की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है। देश के करीब 190 मॉनिटर किए गए थर्मल प्लांट्स में से 80 ऐसे हैं, जहां कोयले का स्टॉक सुरक्षित सीमा यानी 25% से भी नीचे गिर चुका है।

डिस्कॉम्स (DISCOMs) की आर्थिक चुनौती

बिजली की कमी ने राज्य संचालित बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें पावर एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। इस परचेज कॉस्ट के बढ़ने से डिस्कॉम्स के मार्जिन पर गहरा असर पड़ रहा है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। यदि डिस्कॉम्स अपनी खरीदारी को सही तरीके से हेज (Hedge) नहीं कर पाते, तो उन्हें सरकारी मदद की जरूरत पड़ सकती है।

लॉन्ग-टर्म समाधान: PM-DHARA स्कीम

कोयले पर निर्भरता को कम करने के लिए यूनियन कैबिनेट ने ₹1.86 लाख करोड़ की 'PM-DHARA' स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम को ग्रिड में शामिल करना है। इससे उन घंटों के दौरान बिजली की कमी को दूर किया जा सकेगा, जब सोलर पावर की उपलब्धता खत्म हो जाती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह इमरजेंसी उपाय कोयले की कमी के बिना सप्लाई गैप को पाट पाएंगे या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.