भारत ने राजस्थान में 2.8 GW क्षमता वाले Mahi Banswara परमाणु प्लांट के लिए ₹28,000 करोड़ के 'न्यूक्लियर आइलैंड' पैकेज का टेंडर जारी कर दिया है। NPCIL और NTPC के इस संयुक्त उद्यम (Joint Venture) से यह पहला परमाणु प्रोजेक्ट होगा जो पूरी तरह NPCIL के स्वामित्व में नहीं होगा, जो देश की ऊर्जा विस्तार रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
न्यूक्लियर पावर का नया अध्याय
भारत अपने परमाणु ऊर्जा विस्तार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राजस्थान के Mahi Banswara परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग ₹28,000 करोड़ का यह टेंडर, 'न्यूक्लियर आइलैंड' पैकेज पर केंद्रित है, जिसमें रिएक्टर और उनके मुख्य सुरक्षा व नियंत्रण सिस्टम शामिल हैं। यह इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है क्योंकि इस प्रोजेक्ट को अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (Anushakti Vidhyut Nigam Ltd.) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा, जो न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और NTPC लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है।
NPCIL के एकाधिकार को चुनौती
अब तक, NPCIL भारत के परमाणु ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर का एकमात्र संचालक रहा है, जो 8.8 गीगावाट की मौजूदा क्षमता का प्रबंधन करता है। Mahi Banswara संयंत्र देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट बनने जा रहा है जिसे NPCIL के अलावा किसी अन्य कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा। यह परमाणु ऊर्जा के प्रति सरकार के दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देता है। इस योजना के तहत चार स्वदेशी रूप से विकसित 700-मेगावाट के प्रेसराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर (Pressurized Heavy Water Reactors) का निर्माण शामिल है। कंपनियों के लिए इस जटिल इंजीनियरिंग और निर्माण पैकेज के लिए बोली जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2026 है।
रणनीतिक ऊर्जा विस्तार
भारतीय सरकार देश के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक आक्रामक रोडमैप पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य 2047 तक क्षमता को ग्यारह गुना बढ़ाना है। वर्तमान में, परमाणु ऊर्जा भारत के कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3% है। यह प्रोजेक्ट दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उस प्रयास का एक केंद्रीय हिस्सा है। हालांकि सरकारी कंपनियां इस पहल का नेतृत्व कर रही हैं, लेकिन सरकार विकास में तेजी लाने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को आमंत्रित करने के तरीके भी तलाश रही है।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और भविष्य का दृष्टिकोण
अन्य बड़े भारतीय व्यावसायिक समूह भी इस पूंजी-गहन क्षेत्र में रुचि दिखाना शुरू कर चुके हैं। अडानी ग्रुप (Adani Group) और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd.) दोनों ने आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा बाजार में प्रवेश करने के अपने इरादे का संकेत दिया है। निवेशकों के लिए, Mahi Banswara प्रोजेक्ट की सफलता यह दर्शाएगी कि सरकार संयुक्त उद्यमों के माध्यम से बड़े पैमाने पर, जटिल परमाणु अवसंरचना परियोजनाओं को कितनी अच्छी तरह क्रियान्वित कर सकती है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित कुल लागत, नियोजित विशिष्ट इकाइयों के लिए लगभग ₹420 करोड़ है, और पहले रिएक्टर के 2031 में चालू होने की उम्मीद है, इसके बाद अगले पांच वर्षों में अन्य तीन इकाइयां आएंगी। निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिभागी इस पैकेज के लिए बोली प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि इससे लागत की गतिशीलता (cost dynamics) और प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनियों से रुचि का स्तर पता चलेगा।
