भारत का क्लीन कोल पर फोकस
भारत सरकार देश के करीब 400 बिलियन टन कोयला भंडार का इस्तेमाल करने के लिए एक बड़ी योजना लेकर आई है। इसके तहत सरफेस कोल गैसिफिकेशन (Surface Coal Gasification) को बढ़ावा देने के लिए ₹37,500 करोड़ के इंसेटिव का ऐलान किया गया है। इस पहल का मकसद ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना और साथ ही कोयले के इस्तेमाल को पर्यावरण के लिहाज़ से ज़्यादा सुरक्षित बनाना है। कोयला गैसिफिकेशन से कोयले को सिंथेसिस गैस (Synthesis Gas) में बदला जाता है, जो आगे चलकर अमोनिया और मेथनॉल जैसे अहम केमिकल्स बनाने के काम आती है।
पिछली गलतियों से सबक
यह नई योजना ऐसे समय में आई है जब ₹13,000 करोड़ की Talcher फर्टिलाइजर परियोजना दो दशक से अटकी हुई है। इसमें देरी और विवादों की एक बड़ी वजह चीनी ठेकेदार के साथ समस्याएं बताई जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि Talcher प्रोजेक्ट में दिक्कतें इसलिए आईं क्योंकि इसमें गलत किस्म के गैसिफायर (Gasifier) का इस्तेमाल किया गया, जो वहां की कोयले की क्वालिटी के लिए सही नहीं था। यह अनुभव बताता है कि सही टेक्नोलॉजी का चुनाव, खासकर लिग्नाइट गैसिफिकेशन (Lignite Gasification) जैसी खास किस्मों के लिए, कितना ज़रूरी है।
सरफेस बनाम अंडरग्राउंड गैसिफिकेशन
सरकार की यह नई योजना पूरी तरह से सरफेस कोल गैसिफिकेशन पर केंद्रित है। इससे पहले ₹8,500 करोड़ के सरकारी इंसेटिव में सरफेस और अंडरग्राउंड (Underground Coal Gasification - UCG) तरीकों में फर्क नहीं किया गया था। सरफेस प्रोजेक्ट्स के लिए अलग से इंसेटिव देना एक सोची-समझी रणनीति का इशारा है। अंडरग्राउंड कोल गैसिफिकेशन, जिसमें कोयले को जमीन के नीचे ही जलाया जाता है, में काफी चुनौतियां हैं और दुनिया में इसका सिर्फ एक ही कॉमर्शियल प्रोजेक्ट है। भारत में UCG पर रिसर्च तो की जा सकती है, लेकिन अभी इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल संभव नहीं है।
ग्रीन हाइड्रोजन का सस्ता रास्ता?
कोयला गैसिफिकेशन का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे सस्ते दाम पर क्लीन हाइड्रोजन (Clean Hydrogen) बनाया जा सकता है। जानकारों का अनुमान है कि कार्बन कैप्चर (Carbon Capture) के साथ कोयला गैसिफिकेशन से $1.25 प्रति किलोग्राम के हिसाब से हाइड्रोजन मिल सकती है। यह भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के लिए एक अहम साबित हो सकता है। हालांकि, कोयला गैसिफिकेशन से हाइड्रोजन बनाने के आर्थिक फायदों की पुष्टि के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है।
