यूरेनियम आयात से परमाणु ऊर्जा का विकास
यह आयात वित्त वर्ष 2008-2009 से लेकर 2024-2025 के बीच किया गया है। ये सभी आयात अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के कड़े सुरक्षा उपायों (safeguards) के तहत हुए हैं, जो परमाणु सामग्री पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सुनिश्चित करते हैं।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भारी उछाल
आयातित यूरेनियम का इस्तेमाल करके परमाणु ऊर्जा उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। यह 2009-2010 में 3,704 मिलियन यूनिट से बढ़कर 2024-2025 तक अनुमानित 39,180 मिलियन यूनिट तक पहुँच गया है। चालू वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए जनवरी तक 33,815 मिलियन यूनिट बिजली पहले ही उत्पन्न की जा चुकी है।
100 GW क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा को बताया कि सरकार का लक्ष्य 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। वर्तमान क्षमता (8.78 GW, RAPS-1 को छोड़कर) के 2031-32 तक लगभग 22 GW तक बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि चल रही परियोजनाएं पूरी हो रही हैं।
भविष्य की योजनाएं और विस्तार
2032 के बाद, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) का लक्ष्य अतिरिक्त 32 GW जोड़ना है, जिससे 2047 तक कुल क्षमता लगभग 54 GW हो जाए। इस विस्तार में स्वदेशी प्रेसराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर्स (PHWRs) और विदेशी साझेदारों के साथ विकसित लाइट वाटर रिएक्टर्स (LWRs) शामिल होंगे। शेष 46 GW क्षमता अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की फर्मों, राज्य सरकारों और निजी कंपनियों सहित विभिन्न बिजनेस मॉडल का उपयोग करके विकसित की जाएगी।