India Hydropower Output: एल नीनो का असर, बिजली उत्पादन में आई 6.3 GW की गिरावट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Hydropower Output: एल नीनो का असर, बिजली उत्पादन में आई 6.3 GW की गिरावट!

भारत में जून महीने में हाइड्रोपावर (Hydropower) का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले **6.3 गीगावाट (GW)** तक गिर गया है। इसका मुख्य कारण बारिश का कम होना और एल नीनो (El Niño) का असर है।

बिजली की बढ़ी मांग, हाइड्रो पावर हुआ फेल

आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान देश में बिजली की मांग 24.3 GW तक बढ़ गई थी। हाइड्रो पावर की कमी को पूरा करने और बिजली की आपूर्ति बनाए रखने के लिए, कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों (Coal-fired power plants) ने मोर्चा संभाला। इन संयंत्रों का उत्पादन 20.7 GW तक बढ़ा दिया गया।

सौर (Solar) और पवन ऊर्जा (Wind energy) उत्पादन में भी 9.4 GW की बढ़ोतरी हुई, लेकिन ये हाइड्रो पावर से हुई तत्काल कमी को पूरी तरह से पूरा नहीं कर सके। ऐसे में, कोयले और कुछ हद तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) ने ग्रिड को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई।

ऊर्जा उत्पादकों पर असर

ऊर्जा क्षेत्र में इस बदलाव से थर्मल पावर कंपनियों के लिए अधिक उत्पादन का दौर शुरू हो गया है। कोयला प्लांट मांग और नवीकरणीय ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए मुख्य बैकअप के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में, बड़े थर्मल पावर प्लांट वाली कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं, हाइड्रोपावर पर ज्यादा निर्भर कंपनियों को जल स्तर में कमी के कारण परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

आगे क्या?

अगर एल नीनो का प्रभाव बना रहता है, तो ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव तीसरी तिमाही 2026 तक जारी रह सकता है। ऊर्जा कंपनियों के लिए ईंधन की लागत और आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी, क्योंकि कोयले और एलएनजी पर अधिक निर्भरता परिचालन खर्च बढ़ा सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये मौसम-संबंधी परिस्थितियां कब तक बनी रहती हैं, क्योंकि लंबे समय तक सूखे की स्थिति हाइड्रोपावर-निर्भर फर्मों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।

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