भारत में कोयले का कुल भंडार **123.7 मिलियन टन** तक पहुंच गया है, जो देश की **51 दिनों** की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है। पावर प्लांट्स में **23 दिनों** का स्टॉक होने से सप्लाई की चिंताएं फिलहाल टल गई हैं, जबकि कोयले से बिजली उत्पादन में **9.1%** का उछाल देखा गया है।
बिजली उत्पादन में उछाल और सप्लाई की स्थिति
कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मॉनसून के दौरान आई कुछ परिचालन संबंधी चुनौतियों के बावजूद देश में कोयले की सप्लाई स्थिर बनी हुई है। देश के थर्मल पावर प्लांट्स फिलहाल करीब 23 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक बनाए हुए हैं। यह बफर बिजली की अचानक मांग बढ़ने या सप्लाई में किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव की स्थिति में एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है।
मांग में तेजी और चुनौतियां
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन में 9.1% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस मांग के पीछे उद्योगों और घरों में बिजली की खपत बढ़ना मुख्य कारण है। इसके अलावा, एल नीनो जैसे मौसम पैटर्न के कारण हाइड्रो पावर जैसे वैकल्पिक स्रोतों से उत्पादन घटने का दबाव भी कोल-बेस्ड प्लांट्स पर पड़ा है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
निवेशकों की नजर सप्लाई चेन की दक्षता पर है। यदि किसी प्लांट का स्टॉक उसके मानक स्तर के 25% से नीचे गिरता है, तो उसे 'क्रिटिकल' श्रेणी में रखा जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए कोयला मंत्रालय, बिजली मंत्रालय और इंडियन रेलवे मिलकर रेक लोडिंग की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए तालमेल बिठा रहे हैं।
इसमें Coal India Limited की भूमिका सबसे अहम है, जो देश की प्रमुख घरेलू सप्लायर है। आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए, कोयला खदानों से पावर प्लांट तक कोयले की ढुलाई की रफ्तार ही मार्केट के लिए बड़ा ट्रिगर होगी, ताकि औद्योगिक गतिविधियों के दौरान किसी तरह की कमी न आए।
