सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर 2026 से ATF की कीमतों में **₹16** प्रति लीटर और कमर्शियल LPG में **₹62.50** प्रति सिलेंडर का इजाफा किया है। ग्लोबल एनर्जी ट्रेंड्स के चलते हुए इस बदलाव से एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा, हालांकि घरेलू LPG और पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अक्टूबर 2026 से फ्यूल कीमतों में बदलाव किया है। इसके तहत एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की दरें ₹16 प्रति लीटर बढ़कर अब ₹137 हो गई हैं, जो पहले ₹121 थीं। वहीं, 19 किलो वाला कमर्शियल LPG सिलेंडर अब ₹62.50 महंगा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय एनर्जी बेंचमार्क और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल में आए बदलाव के कारण यह फैसला लिया गया है।
एयरलाइन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव
एविएशन इंडस्ट्री में कुल ऑपरेटिंग खर्च का करीब 40% हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है। इस बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। अब एयरलाइंस के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वे इन बढ़े हुए खर्चों को खुद सहें या टिकट की कीमतें बढ़ाकर यात्रियों पर बोझ डालें। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनियां अपनी कॉस्ट स्ट्रक्चर को कैसे मैनेज करती हैं।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चुनौती
होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस के लिए कमर्शियल LPG का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। ₹62.50 की बढ़ोतरी से इन व्यवसायों की रोजमर्रा की लागत में सीधा इजाफा हुआ है। यदि बाजार में मांग स्थिर रही, तो ये कंपनियां कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा के चलते मार्जिन घटने का खतरा भी बना हुआ है।
आम आदमी के लिए राहत
एक तरफ जहां कमर्शियल सेक्टर पर बोझ बढ़ा है, वहीं सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत ₹942 पर स्थिर रखी गई है। साथ ही, पेट्रोल और डीजल के दाम भी मई महीने से स्थिर बने हुए हैं। सरकार की इस दो-स्तरीय (Two-tier) रणनीति का मकसद ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता से आम लोगों को बचाना है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का ट्रेंड ही तय करेगा कि आगे और बदलाव होंगे या नहीं।
