ईरान से भारत को LPG की पहली खेप! अमेरिकी छूट और रुपये में पेमेंट से टली सप्लाई की बड़ी किल्लत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ईरान से भारत को LPG की पहली खेप! अमेरिकी छूट और रुपये में पेमेंट से टली सप्लाई की बड़ी किल्लत
Overview

भारत को सालों बाद ईरान से पहली लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खेप मिल गई है। यह डील 30 दिन की अमेरिकी मंजूरी (US waiver) के तहत हुई है, जिसने देश में गैस सप्लाई के गंभीर संकट को कम करने में मदद की है। इस वजह से उद्योगों को गैस आवंटन में कटौती करनी पड़ रही थी। 'Aurora' नाम का टैंकर मैंगलोर की ओर बढ़ रहा है। खबरों के मुताबिक, भुगतान भारतीय रुपये में किया गया है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और घरेलू सप्लाई में भारी कमी के बीच भारत ने ईरान से लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात फिर से शुरू कर दिया है। यह एक बड़ी रणनीतिक चाल है, जिसे अमेरिका की तरफ से मिली विशेष 30-दिन की छूट (US waiver) के तहत अंजाम दिया गया है।

मंजूरी से शुरू हुआ आयात

अमेरिका की इस छूट ने भारत को कई सालों बाद ईरान से LPG लाने की अनुमति दी है। 'Aurora' नाम का टैंकर, जिसमें LPG भरी है, मैंगलोर बंदरगाह पहुंच चुका है। इस आयात से देश में गैस की भारी कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, जो फिलहाल उद्योगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। खास बात यह है कि इस भुगतान के लिए डॉलर के बजाय भारतीय रुपये का इस्तेमाल किया गया है। इससे भारत को डॉलर-आधारित प्रतिबंधों (sanctions) से बचने में मदद मिली है।

भारत की मध्य पूर्व पर निर्भरता

ईरान से यह आयात ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व (Middle East) पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और अपनी सालाना खपत का लगभग 60% मध्य पूर्व से आयात करता है। पिछले साल यह आंकड़ा 33.15 मिलियन मीट्रिक टन था। सऊदी अरामको (Saudi Aramco) जैसे प्रमुख उत्पादक कंपनियां भारत के आयात लागत को प्रभावित करती हैं।

सरकारी कंपनियां करेंगी वितरण

देश में LPG की सप्लाई मुख्य तौर पर सरकारी कंपनियों - इंडियन ऑयल (Indian Oil), भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (Hindustan Petroleum) द्वारा संभाली जाती है।

ऊर्जा सप्लाई पर भू-राजनीतिक जोखिम

हालांकि, यह आयात भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical risks) के बीच हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों से ऊर्जा आपूर्ति मार्गों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले मार्गों पर खतरा बना रहता है। ऐसे में शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं, जिससे भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा। भारत ने 2019 में पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ईरान से ऊर्जा आयात बंद कर दिया था, जिससे यह कदम महत्वपूर्ण हो जाता है।

छूट पर निर्भरता के खतरे

अमेरिकी मंजूरी पर निर्भर रहना भी एक जोखिम है। अगर अमेरिका अपनी नीति बदलता है या क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है, तो यह सप्लाई अचानक बंद हो सकती है। रुपये में भुगतान से प्रतिबंधों से बचने में मदद तो मिली है, लेकिन यह ट्रेड फाइनेंस की अपनी सीमाएं भी दिखा सकता है। खबरों के मुताबिक, ईरान ने दावा किया है कि उसने फारस की खाड़ी के ऊपर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है, जो शिपिंग लेन को प्रभावित कर सकता है।

रणनीति पर सवाल

कुछ अस्पष्टता भी है, क्योंकि भारत के शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा है कि उन्हें किसी भी लदे हुए ईरानी कार्गो की जानकारी नहीं है। यह विरोधाभासी रिपोर्ट, सरकार की रणनीति पर सवाल उठाती है।

भारत की भेद्यता

अन्य देशों की तुलना में, जिनके पास विविध स्रोत या महत्वपूर्ण घरेलू उत्पादन है, भारत की तंग सप्लाई उसे मध्य पूर्व की गड़बड़ी और मूल्य झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है।

भविष्य का दृष्टिकोण

विश्लेषकों का मानना ​​है कि कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते भारत के ऊर्जा क्षेत्र का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। इसके बावजूद, बढ़ती मध्यम वर्ग की आबादी और सरकारी योजनाओं के कारण LPG की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। भारत फारस की खाड़ी में फंसे अन्य LPG कार्गो को भी निकालने पर विचार कर रहा है और ईरान से और खरीददारी की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि तत्काल सप्लाई की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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