अगस्त के महीने में सरकारी तेल कंपनियों की पेट्रोल और डीजल की बिक्री में जोरदार इजाफा दर्ज किया गया है। मानसून की बेरुखी के चलते सिंचाई के लिए डीजल की मांग बढ़ी है, लेकिन **$91** प्रति बैरल के पार जाते क्रूड ऑयल के दाम निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
सरकारी तेल कंपनियों, जैसे कि IOC, BPCL और HPCL के लिए अगस्त का महीना बिक्री के लिहाज से शानदार रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल की बिक्री 9.1% बढ़कर 3.48 मिलियन टन और डीजल की खपत 10.2% उछलकर 6.27 मिलियन टन रही। आमतौर पर मानसून के दौरान फ्यूल की मांग सुस्त रहती है, लेकिन इस बार स्थिति उलट रही।
डीजल की मांग बढ़ने का कारण
डीजल की खपत में यह तेजी मानसून की कमी के कारण आई है। अगस्त के अंत तक भारत में बारिश की 14% कमी दर्ज की गई, जिसके चलते किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भर रहना पड़ा। इस कृषि आधारित मांग ने फ्रेट और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में आई कमी की भरपाई कर दी। हालांकि, LPG की मांग में 16.1% की गिरावट आई है, क्योंकि औद्योगिक ग्राहक अब PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर रुख कर रहे हैं।
मार्जिन पर दबाव और सरकारी एक्शन
बिक्री बढ़ने के बावजूद निवेशकों की चिंता का असली कारण कच्चे तेल की कीमतें हैं। 1 सितंबर 2026 को ब्रेंट क्रूड $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ने का खतरा है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक नहीं पहुंचाती हैं, तो उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, सरकारी स्तर पर फ्यूल की क्वालिटी को लेकर शुरू किए गए क्रैकडाउन के चलते 2,500 से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स को फिलहाल बंद कर दिया गया है, जो कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या कच्चे तेल के दाम स्थिर होते हैं या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक बार फिर निवेशकों को चौंकाएंगी।
