अगस्त 2026 में भारत की कुल ईंधन खपत घटकर **18.61 मिलियन मीट्रिक टन** रह गई है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की मांग में मजबूती बनी हुई है, लेकिन LPG और Naphtha के इस्तेमाल में आई कमी ने ओवरऑल आंकड़ों पर दबाव डाला है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में ईंधन की कुल खपत में 2.8% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे औद्योगिक और घरेलू उपयोग में आया बदलाव मुख्य कारण माना जा रहा है।\n\n### ट्रांसपोर्ट सेक्टर में तेजी बरकरार\nसड़क परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधनों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। पेट्रोल की खपत 8.2% बढ़कर 3.84 मिलियन मीट्रिक टन और डीजल की खपत 6.8% बढ़कर 7.02 मिलियन मीट्रिक टन रही। इसके अलावा, बिटुमेन की बिक्री में 19.8% का उछाल दिखा है, जो देश में चल रही इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की मजबूती को दर्शाता है।\n\n### क्यों घटी LPG और Naphtha की मांग?\nआंकड़ों में गिरावट मुख्य रूप से गैर-परिवहन ईंधनों की वजह से है। LPG की खपत 17.2% गिरकर 2.35 मिलियन मीट्रिक टन और Naphtha की खपत 22.3% लुढ़ककर 0.83 मिलियन मीट्रिक टन रह गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आर्थिक सुस्ती नहीं, बल्कि एनर्जी स्विच का असर है, क्योंकि लोग अब LPG के बजाय PNG की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।\n\n### OMCs के लिए चुनौती\nनिवेशकों के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) का मार्जिन है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही हैं। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है और कंपनियां उसे ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है।
