प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Bharat Renewable Energy Summit 2026 में 2030 तक **$220 बिलियन** के भारी-भरकम निवेश का रोडमैप रखा है। भारत ने **50%** नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है और अब फोकस ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट हो रहा है।
बड़े लक्ष्यों की ओर कदम
नई दिल्ली में आयोजित Bharat Renewable Energy Summit और Expo 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनर्जी ट्रांजिशन का ब्लूप्रिंट पेश किया। देश ने अपना पेरिस एग्रीमेंट का लक्ष्य, यानी 50% नॉन-फॉसिल पावर कैपेसिटी, 2030 की समय सीमा से 5 साल पहले ही पूरा कर लिया है। अब भारत की नजर 500 गीगावाट (GW) की कुल रिन्यूएबल कैपेसिटी हासिल करने पर है।
निवेश का नया गणित
सरकार अब जनरेशन से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर इंटीग्रेशन पर जोर दे रही है। इसके लिए 2027 से 2030 के बीच लगभग $220 बिलियन (करीब ₹20 लाख करोड़) के निवेश की जरूरत है। यह फंड मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में इस्तेमाल होगा:
- ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन
- एडवांस्ड एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस
- मॉडर्न ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर
निवेशकों के लिए संकेत
यह बदलाव सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स से कहीं आगे का है। सरकार अब रिन्यूएबल एनर्जी की 'इंटरमिटेंसी' (यानी बिजली की सप्लाई का 24/7 उपलब्ध न होना) की समस्या सुलझाना चाहती है, जिसके लिए बैटरी स्टोरेज और स्टेबल ग्रिड नेटवर्क अनिवार्य हैं।
रिस्क फैक्टर्स
इतने बड़े निवेश के लिए स्टेबल रेगुलेटरी माहौल और प्राइवेट सेक्टर का भारी सहयोग जरूरी है। इसके अलावा, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार एक जटिल काम है, जिसमें एग्जीक्यूशन में देरी और कॉस्ट ओवररन्स (लागत बढ़ना) जैसे रिस्क हमेशा बने रहते हैं। अभी भी स्टोरेज टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई चेन शुरुआती दौर में है, जिस पर निवेशकों को करीबी नजर रखनी होगी।
