पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने संकेत दिए हैं कि सरकार अपनी रिफाइनिंग क्षमता को **6.4 मिलियन बैरल** प्रतिदिन तक बढ़ाने के लिए UAE और सऊदी अरब के निवेशकों को भारत के फ्यूल रिटेल नेटवर्क में जगह दे सकती है।
भारत सरकार अपनी घरेलू रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए खाड़ी देशों से भारी मात्रा में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) लाने की योजना बना रही है। पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने स्पष्ट किया है कि बड़े रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी के बदले ग्लोबल एनर्जी कंपनियों को भारत के डाउनस्ट्रीम डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में सुरक्षित एक्सेस दिया जा सकता है।
क्षमता विस्तार का लक्ष्य
देश की बढ़ती एनर्जी डिमांड को देखते हुए रिफाइनिंग कैपेसिटी को वर्तमान के 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 6.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मेगा प्रोजेक्ट्स में एक रिफाइनरी यूनिट की लागत ₹78,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक हो सकती है। सरकार का मकसद घरेलू कंपनियों पर कर्ज का बोझ कम करना और खाड़ी देशों के साथ लॉन्ग-टर्म सप्लाई पार्टनरशिप बनाना है।
रिटेल मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
फिलहाल, भारतीय फ्यूल मार्केट पर Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum का दबदबा है, साथ ही Reliance Industries और Nayara Energy भी प्रमुख खिलाड़ी हैं। यदि खाड़ी देशों की कंपनियां रिटेल मार्केट में उतरती हैं, तो यह भारतीय तेल कंपनियों के मार्केट शेयर और प्रॉफिट मार्जिन के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
जोखिम और चुनौतियां
इस प्लान के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स में निर्माण में देरी और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बड़ा रिस्क है। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ते रुझान के बीच लॉन्ग-टर्म डिमांड का अनुमान लगाना भी एक पेचीदा विषय है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि सरकार कैसे विदेशी निवेश और घरेलू कंपनियों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।
