भारत ने अर्जेंटीना में **5** और लिथियम ब्लॉक हासिल करने के लिए बातचीत तेज कर दी है। यह कदम **₹36,000 करोड़** के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य EV और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए कच्चा माल सुरक्षित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
भारत अपनी क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पूरी तरह आक्रामक मोड में है। सरकारी उपक्रम Khanij Bidesh India Ltd (KABIL) इस विस्तार की अगुवाई कर रहा है, जिसने पहले ही अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में 5 लिथियम ब्लॉक सुरक्षित कर लिए हैं। अगस्त 2026 के अंत में वहां फेज-II ड्रिलिंग पूरी होने के बाद, अब सरकार अपनी पोर्टफोलियो को और बड़ा करने की तैयारी में है।
ग्लोबल पार्टनरशिप का जाल
दक्षिण अमेरिका के अलावा, कोयला और खान मंत्रालय ऑस्ट्रेलिया और चिली के साथ भी बातचीत कर रहा है। मंत्री जी. किशन रेड्डी ने साफ किया है कि सरकार प्राइवेट सेक्टर को भी विदेशों में माइनिंग और प्रोसेसिंग के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि बैटरी और टेक मैन्युफैक्चरिंग में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
स्वदेशी प्रोसेसिंग और रिसाइकिलिंग
सरकार 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' के तहत ₹36,000 करोड़ खर्च कर रही है। इसके तहत महाराष्ट्र और गुजरात में 4 प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना है। इसके साथ ही, ई-वेस्ट रिसाइकिलिंग के जरिए खनिजों की रिकवरी के लिए ₹1,500 करोड़ का फंड रखा गया है। सरकार ने 58 कंपनियों को इंसेंटिव के लिए शॉर्टलिस्ट किया है, ताकि कचरे से सोना (खनिज) निकाला जा सके।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है, लेकिन मार्केट में जोखिम भी कम नहीं हैं। मिनरल प्रोसेसिंग मार्केट में अभी भी चीन का दबदबा है, जिससे सप्लाई चेन पर खतरा बना रहता है। साथ ही, लिथियम की ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशों में माइनिंग से जुड़ी तकनीकी और रेगुलेटरी दिक्कतें निवेशकों के लिए चिंता का सबब हो सकती हैं। अब नजरें अर्जेंटीना के साथ होने वाले नए कॉन्ट्रैक्ट और भारत में लगने वाले प्रोसेसिंग प्लांट्स की प्रोग्रेस पर टिकी हैं।
