भारत में 2027 से नई पेट्रोल-डीजल स्कूटर-बाइक बैन की तैयारी
भारत सरकार 2027 के बाद से नई पेट्रोल-डीजल से चलने वाली दो-पहिया और तिपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर बैन लगाने पर विचार कर रही है। पूर्व NITI Aayog CEO अमिताभ कांत के सुझाव पर यह कदम उठाया जा रहा है। इस इलेक्ट्रिफिकेशन (Electrification) की रणनीति का मुख्य मकसद देश की एनर्जी इंडिपेंडेंस (Energy Independence) को बढ़ाना और भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इसके लिए चीन पर निर्भरता कम करने के लिए डोमेस्टिक बैटरी प्रोडक्शन (Domestic Battery Production) में बड़ा निवेश किया जा रहा है।
भारत के दो-पहिया और तिपहिया मार्केट का इलेक्ट्रिफिकेशन
यह प्रस्तावित बैन भारत के बड़े दो-पहिया और तिपहिया मार्केट को टारगेट करेगा, जो फिलहाल देश की कुल EV बिक्री का 80% है। भारतीय EV मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, और अनुमान है कि 2032-2035 तक इसका साइज $18 बिलियन से बढ़कर $1.2 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) इस ग्रोथ में सबसे आगे हैं, जिसे सरकारी नीतियों और ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी से बढ़ावा मिल रहा है। Tata Motors जैसी कंपनियाँ, जिनकी EV मार्केट में 73.1% हिस्सेदारी है, अपने इलेक्ट्रिक मॉडल्स और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। यह बैन Bajaj Motors, TVS और Hero MotoCorp जैसे पारंपरिक निर्माताओं को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मॉडल्स पर स्विच करने के लिए मजबूर कर सकता है।
डोमेस्टिक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश
भारत के इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक मजबूत डोमेस्टिक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विकास महत्वपूर्ण है। भारतीय कंपनियाँ इस क्षेत्र में बड़ा निवेश कर रही हैं। Exide Industries अपनी सब्सिडियरी Exide Energy Solutions के लिए लिथियम-आयन बैटरी प्लांट में $540 मिलियन (₹4,802 करोड़) से अधिक का निवेश कर रही है। Amara Raja Energy & Mobility 2027 तक लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए लगभग $1.1 बिलियन (₹9,500 करोड़) का निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें तेलंगाना में एक बड़ा गीगाफैक्ट्री (Gigafactory) भी शामिल है। Reliance Industries ने गुजरात के जामनगर में $8 बिलियन (₹75,000 करोड़) से अधिक के निवेश के साथ एक विशाल बैटरी गीगाफैक्ट्री विकसित करने की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक उत्पादन शुरू करना है। Tata Group की Agratas भी गुजरात में एक सुविधा स्थापित कर रही है। ये प्रयास चीन पर आयात निर्भरता कम करने के लिए सेल और पैक मैन्युफैक्चरिंग दोनों पर केंद्रित हैं। हालांकि, एडवांस टेक्नोलॉजी और कच्चे माल की उपलब्धता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, क्योंकि चीन ग्लोबल प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग में हावी है।
बड़े रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य
EV को बढ़ावा देने के साथ-साथ, कांत ने रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी को वर्तमान 283 GW से बढ़ाकर 1,500 GW करने का भी आह्वान किया है। इस व्यापक एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) रणनीति में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Transmission Infrastructure), बैटरी स्टोरेज सॉल्यूशंस (Battery Storage Solutions) और क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग (Critical Mineral Processing) को बेहतर बनाना शामिल है। इन एडवांसमेंट्स को AI, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और यह भारत के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल पावर कैपेसिटी हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
चुनौतियाँ और जोखिम
महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और बड़े निवेशों के बावजूद, भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कई स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति, कुशल श्रमिकों की कमी और उच्च उत्पादन लागत शामिल हैं। कम रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) खर्च नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा डालता है। चीन की बैटरी मिनरल प्रोसेसिंग और सेल मैन्युफैक्चरिंग में 80% से अधिक की ग्लोबल कैपेसिटी पर भारी पकड़ एक बड़ी चुनौती है। Reliance द्वारा चीनी फर्मों के साथ बातचीत के बाद लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को रोकना इस निर्भरता को दर्शाता है। डोमेस्टिक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग की सफलता इन बाधाओं को दूर करने और महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी व कच्चे माल तक पहुंच सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, EV ट्रांजिशन स्थापित ऑटोमेकर्स के लिए जटिलताएं पैदा करता है, और प्रस्तावित बैन Bajaj Motors, TVS और Hero MotoCorp जैसी कंपनियों को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के EV ट्रांजिशन का आउटलुक
2027 तक पेट्रोल-डीजल स्कूटर पर संभावित बैन भारत की इलेक्ट्रिफिकेशन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पॉलिसी की सफलता देश की डोमेस्टिक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ाने, आवश्यक कच्चे माल को सुरक्षित करने और अपने औद्योगिक क्षेत्र की मौजूदा स्ट्रक्चरल चुनौतियों का समाधान करने की क्षमता पर निर्भर करती है। यदि इन बाधाओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जाता है, तो भारत एनर्जी इंडिपेंडेंस हासिल कर सकता है और बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति बन सकता है।
