रूस में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए ड्रोन हमलों के कारण आई ईंधन की भारी कमी को दूर करने के लिए भारत ने पिछले दो महीनों में लगभग **10 लाख बैरल** पेट्रोल रूस भेजा है।
रूस, जो पारंपरिक रूप से दुनिया को ईंधन निर्यात करता रहा है, इस समय भयंकर घरेलू कमी का सामना कर रहा है। रिफाइनरी क्षमता पर हुए लगातार हमलों ने उन्हें बाहरी देशों से पेट्रोल मंगाने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी बीच, भारत एक महत्वपूर्ण सप्लायर के तौर पर उभरा है, जिसने जून और जुलाई 2026 में रूस को 10 लाख बैरल पेट्रोल शिप किया है।
वैडीनार रिफाइनरी की अहम भूमिका
इस सप्लाई में सबसे बड़ा नाम गुजरात स्थित 'वैडीनार रिफाइनरी' का सामने आया है। इस रिफाइनरी का संचालन 'Nayara Energy' करती है, जिसमें रूसी कंपनी 'Rosneft' की लगभग 50% हिस्सेदारी है। यह ट्रेड काफी दिलचस्प है, क्योंकि भारत एक तरफ भारी डिस्काउंट पर रूसी क्रूड ऑयल खरीद रहा है, तो दूसरी तरफ उसी तेल को रिफाइन कर पेट्रोल के रूप में वापस रूस भेज रहा है।
शिपिंग और रेगुलेटरी रिस्क
इंटरनेशनल सैंक्शंस (प्रतिबंधों) के कारण ये शिपमेंट सामान्य कमर्शियल रास्तों से नहीं जा रहे हैं। डेटा के मुताबिक, इन कार्गो को 'सेंक्शन्ड टैंकर फ्लीट्स' के जरिए भेजा जा रहा है। अपनी पहचान छिपाने के लिए अक्सर मेडिटेरेनियन (भूमध्य सागर) में जहाज-से-जहाज (ship-to-ship) ट्रांसफर किए जाते हैं, जिसमें जहाजों का ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद रखा जाता है।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
भले ही Nayara Energy एक अनलिस्टेड कंपनी है, लेकिन यह ट्रेड पूरे भारतीय ऑयल और गैस सेक्टर पर नजरें टिकाए हुए है। यदि भू-राजनीतिक दबाव बढ़ता है, तो लॉजिस्टिक लागत और सेकेंडरी सैंक्शंस का खतरा भी बढ़ सकता है। रूस ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर बैन को 2027 की शुरुआत तक बढ़ा दिया है, जिससे साफ है कि भारत से ईंधन की मांग बनी रह सकती है। निवेशकों को सरकार की नई पॉलिसी और रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाले बदलावों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
