भारत ने अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए एलपीजी (LPG) इम्पोर्ट नेटवर्क को अब **41** देशों तक फैला लिया है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता घटाकर सरकार ने घरेलू प्रोडक्शन को **55,000 मीट्रिक टन** प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बड़ा कदम
भारत सरकार ने अपनी एनर्जी सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव करते हुए खाड़ी देशों के पारंपरिक रास्तों पर निर्भरता कम कर दी है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि अब देश की सप्लाई 41 अलग-अलग देशों से आ रही है, जिससे भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) का असर कम होगा।
अमेरिका और अल्जीरिया पर फोकस
इस नई रणनीति के तहत अमेरिका और अल्जीरिया अहम सप्लायर बनकर उभरे हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का 67% एलपीजी इम्पोर्ट अब अमेरिका से आता है। इस नए एग्रीमेंट से घरेलू बाजार को अचानक सप्लाई चेन झटकों से बड़ी सुरक्षा मिली है।
घरेलू प्रोडक्शन का बूस्ट
भारत ने अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी को 34,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया है। यह घरेलू बफर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें स्पॉट मार्केट पर महंगी खरीदारी करने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।
पैनिक बुकिंग और सरकारी दखल
होर्मुज संकट के दौरान बाजार में पैनिक बुकिंग देखने को मिली थी, जहां मांग 5.1 मिलियन यूनिट्स से उछलकर 9 मिलियन तक पहुंच गई थी। सरकार ने इसे 'होर्डिंग' (Hoarding) करार दिया और कड़े प्रशासनिक फैसले लेकर इसे वापस नॉर्मल लेवल पर ला खड़ा किया। हालांकि, ओएमसी (OMC) कंपनियों का मार्जिन अभी भी ग्लोबल एनर्जी कीमतों पर टिका है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
