पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि भारत ने अपनी एनर्जी सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए अब 41 देशों से तेल आयात करने का नेटवर्क तैयार कर लिया है। देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में यह कदम सप्लाई चैन को मजबूत रखने में मदद करेगा।
एनर्जी सिक्योरिटी पर सरकार का फोकस
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और रेड सी (Red Sea) जैसे समुद्री रास्तों में चल रही उथल-पुथल के बावजूद, सरकार ने दावा किया है कि घरेलू फ्यूल सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है और यहां एनर्जी डिमांड ग्लोबल औसत के मुकाबले 3 गुना तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी निर्भरता को सीमित देशों से हटाकर फैला दिया है।
आयात नेटवर्क का विस्तार
पहले भारत मुख्य रूप से 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, जिसे बढ़ाकर अब 41 देशों तक पहुंचा दिया गया है। इस कदम का सीधा मकसद यह है कि अगर सऊदी अरब, UAE या कतर जैसे पारंपरिक सप्लायर देशों में कोई विवाद होता है, तो भारत को फ्यूल शॉर्टेज का सामना न करना पड़े।
OMCs पर क्या होगा असर?
इक्विटी निवेशकों के लिए सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) का प्रदर्शन अहम है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इन कंपनियों को हर दिन ₹530 करोड़ का 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम पर बिक्री) झेलना पड़ रहा है। Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए ये आंकड़ा मार्जिन और डिविडेंड क्षमता को समझने के लिहाज से बेहद जरूरी है।
LPG का बढ़ता दायरा और भविष्य की राह
देश में LPG कनेक्शन की संख्या 14 करोड़ (साल 2014) से बढ़कर अब 33.5 करोड़ तक पहुंच गई है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने डेली प्रोडक्शन क्षमता को 34,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन कर दिया है। इसके अलावा, सरकार अब एनर्जी सस्टेनेबिलिटी की ओर भी कदम बढ़ा रही है। इसके लिए 'GOBARdhan' स्कीम लॉन्च की गई है, जिसके लिए ₹23,731 करोड़ का फंड रखा गया है। यह स्कीम कचरे से क्लीन 'कंप्रेस्ड बायोगैस' बनाने पर आधारित है, जो भविष्य में भारत की एनर्जी जरूरतों को नई दिशा देगी।
