मध्य पूर्व (Middle East) के तनाव ने बढ़ाई डीजल की मांग, एक्सपोर्ट में 20% की तेजी
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में मार्च के महीने में रिफाइंड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में बड़े बदलाव देखे गए। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव के बीच, भारत के डीजल की शिपमेंट करीब 20% बढ़कर 12.90 मिलियन बैरल तक पहुंच गई, जो फरवरी में 10.74 मिलियन बैरल थी। इस जोरदार उछाल की मुख्य वजह इस दौरान डीजल पर मिले बेहतर प्रॉफिट मार्जिन रहे।
रिफाइनरियों का फोकस बदला: डीजल बढ़ा, पेट्रोल घटा
रिफाइनरियों ने इन बेहतर मुनाफे का फायदा उठाने के लिए अपनी रणनीति बदली। कच्चे तेल और रिफाइंड डीजल के बीच मुनाफे का अंतर बढ़ने के कारण उन्होंने डीजल का प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बढ़ाया। वहीं, पेट्रोल के एक्सपोर्ट में 33% की भारी गिरावट आई और यह 8.31 मिलियन बैरल पर आ गया। पेट्रोल मार्जिन स्थिर रहने के चलते रिफाइनरियों ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के प्रोडक्शन पर ज्यादा ध्यान दिया। इसका मकसद खाड़ी क्षेत्र से संभावित सप्लाई में रुकावटों के बीच एलपीजी की आपूर्ति सुरक्षित करना है।
घरेलू सप्लाई पर फोकस: लगी एक्सपोर्ट ड्यूटी, रिलायंस का दबदबा
घरेलू ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और एक्सपोर्ट पर लगाम कसने के लिए, भारत ने डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई। डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और जेट फ्यूल पर ₹29.5 प्रति लीटर की ड्यूटी लगाई गई है। इसका मकसद प्राइवेट रिफाइनरों को एक्सपोर्ट को प्राथमिकता देने से रोकना है। मार्च में Reliance Industries कुल रिफाइंड फ्यूल शिपमेंट का लगभग 75% हिस्सा निर्यात करने वाला प्रमुख प्लेयर रहा। डीजल एक्सपोर्ट में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद, मार्च में भारत के कुल रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में 8% की गिरावट आई और यह 31 मिलियन बैरल रहा, जो फरवरी में 33.67 मिलियन बैरल था।