भारत का बड़ा फैसला! 1 GW विंड एनर्जी टेंडर रोके, रिन्यूएबल एनर्जी स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का बड़ा फैसला! 1 GW विंड एनर्जी टेंडर रोके, रिन्यूएबल एनर्जी स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव
Overview

भारत सरकार ने 1 GW विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए नए टेंडर (tender) को फिलहाल टाल दिया है। स्टील की बढ़ती कीमतों और बोली लगाने वालों की कम दिलचस्पी के चलते यह फैसला लिया गया है। यह कदम मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) की व्यापक रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

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लागत बढ़ी, टेंडर रुके: नई रणनीति की ओर भारत

भारत सरकार ने 1 GW विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए नए टेंडर (tender) को फिलहाल टाल दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह स्टील की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी बताई जा रही है। विंड टर्बाइन टावर बनाने के लिए स्टील एक अहम कंपोनेंट (component) है, और इसकी महंगी लागत के चलते प्रोजेक्ट की इकोनॉमिक्स (economics) पर सीधा असर पड़ा है। सूत्रों का कहना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी के कारण बोली लगाने वाले (bidders) भी खास उत्साहित नहीं दिख रहे हैं।

सिर्फ विंड ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी का पूरा इकोसिस्टम होगा मजबूत

सिर्फ विंड एनर्जी पर फोकस नहीं, मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) अब रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए एक ज्यादा इंटीग्रेटेड (integrated) और डाइवर्सिफाइड (diversified) रणनीति पर काम कर रही है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर नए विंड इन्वेस्टमेंट (investment) रोडमैप्स तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही, छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स (small hydro projects) के लिए नई पॉलिसीज़ पर भी काम चल रहा है। इतना ही नहीं, सरकार डोमेस्टिक सोलर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग (domestic solar component manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए फाइनेंसियल सपोर्ट (financial support) देने पर भी विचार कर रही है, जैसे कि सोलर इंगोट्स (ingots) और वेफर्स (wafers) के प्रोडक्शन (production) में।

बड़े लक्ष्य और सामने चुनौतियां

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी (non-fossil fuel capacity) हासिल करना है और 2070 तक नेट-जीरो (net-zero) एमिशन का वादा किया है। इस सेक्टर में पिछले 5 सालों में करीब ₹350 बिलियन का निवेश हुआ है। हालांकि, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) की खराब फाइनेंशियल हेल्थ (financial health) और पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) पर साइन होने में देरी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। वहीं, बैटरी स्टोरेज (battery storage) की लागत भले ही गिरी है, लेकिन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (transmission infrastructure) और ग्रिड इंटीग्रेशन (grid integration) का खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स (hybrid projects) और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (energy storage systems) की जरूरत बढ़ रही है।

डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर और बढ़ती लागतें

स्टील जैसी ज़रूरी कमोडिटीज़ (commodities) की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की लागत पर पड़ रहा है। यह सरकार के 'मेक इन इंडिया' (Make in India) विज़न और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग (domestic manufacturing) को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी प्रभावित कर सकता है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत सोलर मॉड्यूल के बाद अब सरकार सोलर इंगोट्स (ingots) और वेफर्स (wafers) के डोमेस्टिक प्रोडक्शन (domestic production) के लिए भी आर्थिक मदद पर विचार कर रही है, ताकि इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो सके।

टेंडर रोकने के पीछे की प्रमुख दिक्कतें

टेंडर्स का बार-बार पोस्टपोन (postpone) होना और कैंसल (cancel) होना इस सेक्टर की एक बड़ी समस्या रही है। 2020-2024 के बीच करीब 19% इश्यू की गई कैपेसिटी (capacity) वाले टेंडर्स में दिक्कतें आईं। इसके पीछे जटिल टेंडर डिजाइन (tender design), कम बोली लगना और पावर सेल एग्रीमेंट्स (PSAs) में लंबी देरी जैसे कारण हैं। डिस्कोम्स (DISCOMs) की वित्तीय कमजोरी भी रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल की लागत (cost of capital) बढ़ाती है। कुछ सोलर सप्लाई चेन कंपोनेंट्स (solar supply chain components) के लिए इंपोर्ट पर निर्भरता भी सप्लाई चेन रिस्क (supply chain risks) बढ़ाती है। स्टील की बढ़ती लागत से विंड प्रोजेक्ट्स की इकोनॉमिक्स पर दबाव पड़ सकता है, जिससे deployment धीमा हो सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.