यह बड़ा सरकारी फैसला, जो घरेलू तेल और गैस कंपनियों की लाभप्रदता (profitability) को बढ़ाने के इरादे से लिया गया है, इसके तहत ऑनशोर (onshore) तेल ब्लॉक से मिलने वाले कच्चे तेल पर रॉयल्टी की दर को घटाकर 12.5% कर दिया गया है। साथ ही, नए कुओं से निकलने वाली प्राकृतिक गैस के लिए यह दर 10% से घटाकर 9% कर दी गई है।
सबसे बड़ा इंसेंटिव (incentive) उन क्षेत्रों के लिए है जहाँ सरकार एक्सप्लोरेशन (exploration) को बढ़ावा देना चाहती है। नई नीतियों के तहत, डीपवॉटर (deepwater) और अल्ट्रा-डीपवॉटर (ultra-deepwater) फील्ड्स के लिए पहले 7 सालों तक शून्य रॉयल्टी लगेगी। यह कदम हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) पॉलिसी के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए है।
इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर ONGC, Oil India और Vedanta के तेल-गैस कारोबार पर पड़ेगा। इन कंपनियों के लिए प्रति बैरल कमाई (earnings per barrel) बढ़ेगी, क्योंकि रॉयल्टी का भुगतान प्रॉफिट शेयरिंग से पहले होता है। साल की शुरुआत से अब तक ONGC के शेयरों में 20.6% और Oil India के शेयरों में 12.2% की तेजी आई है, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) में 8% की गिरावट देखी गई है। Vedanta के शेयर भी पिछले साल दोगुने हो गए हैं।
मार्केट कैप की बात करें तो ONGC का मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) करीब ₹3.53 ट्रिलियन है, जबकि Oil India का लगभग ₹74,000 करोड़ है। Vedanta का ऑयल एंड गैस सेगमेंट इस बड़े समूह का हिस्सा है जिसका कुल मार्केट कैप लगभग ₹1.17 ट्रिलियन है।
भारतीय तेल और गैस अपस्ट्रीम मार्केट के 2031 तक 4.95% की सीएजीआर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, भारत अभी भी अपनी 85% कच्चे तेल और 50% प्राकृतिक गैस की ज़रूरतें आयात से पूरी करता है, जो सरकार के घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को दर्शाता है।
ONGC देश के तेल उत्पादन का लगभग 70% और गैस उत्पादन का 84% हिस्सा कवर करता है। Vedanta का ऑयल एंड गैस डिविजन भी इस पॉलिसी से लाभान्वित होगा। विश्लेषकों (Analysts) का मानना है कि यह कदम कंपनियों के लिए बेहतर कैश फ्लो (cash flow) और मार्जिन (margins) सुनिश्चित करेगा।
हालांकि, इस क्षेत्र में चुनौतियां बनी हुई हैं। कच्चे तेल पर 90% की इंपोर्ट निर्भरता वैश्विक मूल्य अस्थिरता (global price volatility) और भू-राजनीतिक (geopolitical) अस्थिरता के प्रति अर्थव्यवस्था को संवेदनशील बनाती है। सरकार की नीतियां, जैसे कि कीमत गिरने पर उच्च उत्पाद शुल्क (excise duties), भी इन फायदों को बेअसर कर सकती हैं। Vedanta के मामले में, हालिया डी-मर्जर (demerger) के कारण कर्ज आवंटन और नए एंटिटीज़ (entities) के प्रदर्शन को लेकर थोड़ी जटिलता बनी हुई है।
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा (energy security) को बढ़ाना है, जिसके लिए घरेलू उत्पादन में वृद्धि और प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देना अहम है। शून्य-रॉयल्टी की पेशकश, विशेष रूप से डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन के लिए, नई और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करेगी। ONGC और Oil India जैसी कंपनियों के लिए, यह बदलाव तुरंत बेहतर कैश फ्लो और मार्जिन में तब्दील होगा, जो पूंजीगत व्यय (capital spending) और संभावित रूप से उच्च डिविडेंड (dividends) का समर्थन करेगा। भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 15% करना है, जिसके लिए ये कंपनियां रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
