सरकारी दांव! तेल कंपनियों को राहत, मगर खजाने पर भारी? पेट्रोल-डीजल टैक्स में बड़ी कटौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
सरकारी दांव! तेल कंपनियों को राहत, मगर खजाने पर भारी? पेट्रोल-डीजल टैक्स में बड़ी कटौती
Overview

भारत सरकार ने सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले से आम ग्राहकों को फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार लागत का एक हिस्सा वहन कर रही है। हालांकि, इस कदम से देश के फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

सरकार ने 26 मार्च 2026 से लागू होने वाले एक अहम फैसले में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस कदम का सीधा मकसद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को सहारा देना है। बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) के चलते ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें फरवरी के अंत से लगभग 50% तक उछल चुकी हैं। अगर यह हस्तक्षेप न होता, तो OMCs को भारी नुकसान उठाना पड़ता।

पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, डीजल पर ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी घरेलू इस्तेमाल के लिए पूरी छूट दी गई है। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के लिए रिटेल फ्यूल प्राइस (Retail Fuel Price) को स्थिर रखना है। फाइनेंस मिनिस्टर (Finance Minister) ने कहा कि यह सरकार की प्रतिबद्धता है कि बढ़ी हुई इम्पोर्ट कॉस्ट (Import Cost) का एक हिस्सा जनता पर न डाला जाए।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) ने इस कदम को Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों के मार्जिन को सपोर्ट करने के लिए एक जरूरी उपाय माना। हालांकि, शुरुआती ट्रेडिंग में OMCs के शेयरों में मिली-जुली और क्षणिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum के शेयर इंट्रा-डे (Intra-day) में गिरे, जबकि Hindustan Petroleum में मामूली बढ़त दर्ज की गई। इससे निवेशकों में इस वित्तीय सहायता की लंबी अवधि की स्थिरता या व्यापक बाजार दबाव के मुकाबले इसके सीमित प्रभाव को लेकर संदेह झलकता है। दूसरी ओर, प्राइवेट रिटेलर Nayara Energy ने पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी थीं, जो लागत को आगे बढ़ाने की बाजार की मंशा को दर्शाता है।

इस बीच, ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) का सेंटिमेंट (Sentiment) नेगेटिव हो गया। BSE Sensex में भारी गिरावट आई और Nifty 50 ने 23,000 के स्तर को छुआ। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹94 के पार चला गया, और बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) 6.93% पर पहुंच गया। ये उतार-चढ़ाव दर्शाते हैं कि निवेशक ड्यूटी कट के फिस्कल इम्प्लीकेशंस (Fiscal Implications) को लेकर चिंतित हो गए हैं। Emkay Global का अनुमान है कि इस फैसले का सालाना फिस्कल इम्पेक्ट (Fiscal Impact) ₹1.55 लाख करोड़ हो सकता है। कंपनी का मानना है कि सरकार मौजूदा कीमतों पर OMCs के 30-40% नुकसान को कवर करेगी, जो राष्ट्रीय वित्त पर एक बड़ा बोझ है।

सरकार की यह रणनीति, OMCs को सहारा देने के बावजूद, फिस्कल रिस्क (Fiscal Risk) को बढ़ाती है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ती अस्थिरता के बीच हाई एनर्जी प्राइसेज (High Energy Prices) FY27 में भारत की फिस्कल पोजीशन (Fiscal Position) पर दबाव डाल सकती हैं। इससे सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है और रेवेन्यू कलेक्शन (Revenue Collection) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ICRA ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ऊंचे एनर्जी प्राइसेज के कारण भारत के फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) के लिए अपसाइड रिस्क (Upside Risk) बना हुआ है। प्राइवेट प्लेयर्स के विपरीत, जो कीमतों को एडजस्ट करने में अधिक फ्लेक्सिबल (Flexible) हो सकते हैं, सरकारी OMCs सरकारी नीतियों से बंधी हैं, जिससे वो वोलेटाइल मार्केट (Volatile Market) में अपनी कॉम्पिटिटिव फ्लेक्सिबिलिटी (Competitive Flexibility) खो सकती हैं। इसके अलावा, इन सपोर्ट मेजर्स से होने वाले इम्प्लाइड फिस्कल डेफिसिट एक्सपेंशन (Implied Fiscal Deficit Expansion) के कारण बॉरोइंग कॉस्ट (Borrowing Cost) बढ़ सकती है। यह प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Private Investment) को क्राउड आउट (Crowd Out) कर सकता है और सोवरेन क्रेडिट रेटिंग (Sovereign Credit Rating) को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, OMCs का मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) भी इन सिस्टमिक रिस्क (Systemic Risks) को दर्शाता है। Indian Oil Corporation लगभग 15x के P/E पर ट्रेड कर रहा है, Bharat Petroleum 12x पर, और Hindustan Petroleum 10x पर, जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फर्मों की तुलना में डिस्काउंट (Discount) दिखाता है।

यह पॉलिसी एक्शन हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की वोलेटाइल जियोपॉलिटिकल क्लाइमेट (Geopolitical Climate) से गहराई से जुड़ा हुआ है। भले ही ईरान ने चुनिंदा देशों को सुरक्षित मार्ग की पेशकश की है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर संभावित बढ़त को लेकर। सरकार का यह हस्तक्षेप तत्काल प्राइस शॉक (Price Shock) के खिलाफ एक बफर (Buffer) प्रदान करने के लिए जान पड़ता है। हालांकि, हाई क्रूड ऑयल प्राइसेज और नतीजतन फिस्कल स्ट्रेन (Fiscal Strain) से उत्पन्न होने वाले अंडरलाइंग मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर (Underlying Macroeconomic Pressure) एक स्थायी चिंता बने रहने की संभावना है। OMCs का भविष्य प्रदर्शन ग्लोबल क्रूड प्राइस की दिशा और सरकार की व्यापक आर्थिक उद्देश्यों से समझौता किए बिना फिस्कल सपोर्ट (Fiscal Support) को बनाए रखने की क्षमता से काफी प्रभावित होगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि एनर्जी प्राइसेज के किसी भी लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की अवधि FY27 में भारत के फिस्कल मेट्रिक्स (Fiscal Metrics) पर दबाव बनाए रखेगी।

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