भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट पर टैक्स का बोझ कम किया है। 1 सितंबर, 2026 से लागू नई दरों के तहत डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाकर **₹1 प्रति लीटर** और विंडफॉल टैक्स **₹19 प्रति लीटर** कर दिया गया है।
भारत सरकार ने पेट्रोलियम एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत देते हुए टैक्स नियमों में बदलाव का ऐलान किया है। 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी इन बदलावों के तहत डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को पिछली ₹3 प्रति लीटर से घटाकर अब ₹1 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, विंडफॉल टैक्स में भी राहत देते हुए इसे पहले के ₹24 प्रति लीटर से कम करके ₹19 प्रति लीटर तय किया गया है।
रिफाइनरी मार्जिन पर असर
यह बदलाव रिलायंस इंडस्ट्रीज, नायरा एनर्जी जैसी प्राइवेट कंपनियों और ONGC, ऑयल इंडिया जैसी सरकारी तेल कंपनियों के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। विंडफॉल टैक्स वह लेवी है जो सरकार तब लगाती है जब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों के कारण तेल कंपनियों को अत्यधिक मुनाफा होता है। टैक्स में इस कटौती का सीधा मतलब है कि अब कंपनियों को एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रखने को मिलेगा। इससे रिफाइनर्स की नेट रियलाइजेशन यानी प्रति लीटर मुनाफे में सुधार की उम्मीद है।
रेगुलेटरी रिस्क को समझना
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह कोई स्थायी बदलाव नहीं है। सरकार हर पखवाड़े (Fortnightly) ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों और डिमांड को देखते हुए इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। यदि भविष्य में तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आती है, तो सरकार फिर से टैक्स बढ़ा सकती है। यह अनिश्चितता निवेशकों के लिए एक रिस्क फैक्टर बनी हुई है। रिफाइनरी कंपनियों का मुनाफा सरकार की इन नीतियों और ग्लोबल जिओ-पॉलिटिकल हालातों के प्रति काफी संवेदनशील होता है। ऐसे में बाजार की नजर अब ग्लोबल क्रूड प्राइस ट्रेंड और सरकार के अगले रिव्यु साइकिल पर टिकी रहेगी।
