Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में 14 साल की सबसे बड़ी उछाल, $120 के पार पहुंचा भाव

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में 14 साल की सबसे बड़ी उछाल, $120 के पार पहुंचा भाव

भारत के लिए क्रूड ऑयल बास्केट का भाव अक्टूबर में **$120.46** प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो **2012** के बाद का उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कमजोर रुपये के कारण तेल कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ रहा है और LPG अंडर-रिकवरी **₹62,000 करोड़** तक पहुंच गई है।

तेल का बढ़ता बोझ और लॉजिस्टिक्स की चुनौती

भारत का एनर्जी इंपोर्ट बिल भारी दबाव में है। 26 अक्टूबर, 2026 तक क्रूड ऑयल का भाव $120.46 प्रति बैरल दर्ज किया गया है। वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्षों की वजह से मरीन इंश्योरेंस और ग्लोबल शिपिंग फ्रेट रेट्स में जबरदस्त तेजी आई है, जिससे तेल की कुल लागत काफी बढ़ गई है।

अब रिफाइनर्स को तेल 'डिलीवर्ड बेसिस' पर खरीदना पड़ रहा है, जहां डिलीवरी और संबंधित जोखिमों का भुगतान उन्हें पहले करना पड़ता है, जो लागत को और अधिक अस्थिर बना रहा है।

सरकारी कंपनियों पर मार

पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर काफी दबाव है क्योंकि वे बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं। इसी का नतीजा है कि अकेले LPG में अंडर-रिकवरी ₹62,000 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है। निवेशक अब Indian Oil Corporation जैसी दिग्गज कंपनियों के आगामी नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं कि यह दबाव उनके फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को कितना प्रभावित करता है।

इकोनॉमी पर असर

रुपया 95 के करीब ट्रेड कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम में हर $10 की बढ़ोतरी से भारत का नेट ऑयल इंपोर्ट बिल लगभग $12 बिलियन से $13 बिलियन तक बढ़ जाता है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में नेट ऑयल और गैस इंपोर्ट बिल 35% उछलकर $81.1 बिलियन तक पहुंच गया है, जो करंट अकाउंट डेफिसिट को और बढ़ा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.