India Crude Imports: कच्चे तेल का आयात पहुंचा 1 साल के शिखर पर, अमेरिकी कानून के डर से बदला सप्लाई रूट

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Crude Imports: कच्चे तेल का आयात पहुंचा 1 साल के शिखर पर, अमेरिकी कानून के डर से बदला सप्लाई रूट

भारत में कच्चे तेल का आयात सितंबर में **5.26 मिलियन बैरल प्रतिदिन** के एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी **39%** है। यह बदलाव अमेरिका के 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' के बाद आया है, जिसके तहत रूसी ऊर्जा खरीदने पर भारी टैरिफ का खतरा है।

अमेरिका के नए कानून का असर

भारत की ऊर्जा खरीद की रणनीति में यह बड़ा बदलाव अमेरिका द्वारा लागू किए गए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' की वजह से आया है। इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों पर 100% तक का टैरिफ लगा सकता है जो रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा का आयात जारी रखते हैं। इस सख्ती के चलते भारतीय रिफाइनर्स ने सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे खाड़ी देशों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

रिफाइनिंग और ऑपरेशनल चुनौतियां

रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल अब भारतीय कंपनियों के लिए महंगा साबित हो रहा है। सितंबर में रूस से आयात घटकर 1.75 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो अप्रैल 2026 के बाद सबसे निचला स्तर है। अब सप्लाई के लिए 'शिप-टू-शिप' ट्रांसफर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे जटिल रास्तों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे शिपिंग और इंश्योरेंस लागत बढ़ रही है।

निवेशकों के लिए जोखिम

ऊर्जा आयात बिल में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये (Rupee) पर पड़ सकता है। निवेशकों को यह नजर रखनी होगी कि क्या कंपनियां इस बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी या फिर इसका असर उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। मध्य पूर्व में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता भी सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है, जो भविष्य में एफआईआई (FII) आउटफ्लो का कारण बन सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.