चीन की यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) परियोजना के जवाब में भारत अरुणाचल प्रदेश में **11.2 GW** के 'सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट' की योजना बना रहा है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट फिजिबिलिटी स्टेज पर है और निवेशकों को इसकी लंबी समय-सीमा और चुनौतियों पर नजर रखनी चाहिए।
स्ट्रैटेजिक और इकोनॉमिक महत्व
भारत अरुणाचल प्रदेश में 11.2 GW का विशाल 'सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट' बनाने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद ब्रह्मपुत्र बेसिन में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना और 9.2 अरब क्यूबिक मीटर की स्टोरेज क्षमता तैयार करना है। यह प्रोजेक्ट चीन की 60 GW की हाइड्रोपावर परियोजना के मुकाबले एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Investment Risks)
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के जानकार जानते हैं कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स 'कैपिटल-इंटेंसिव' होते हैं। इनमें निवेश का रिटर्न मिलने में सालों लग जाते हैं। निवेशकों को इस तरह के प्रोजेक्ट्स के फंडिंग स्ट्रक्चर और सरकारी मंजूरी के 'टाइमलाइन' पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
कहां फंसी हैं चुनौतियां?
- प्रारंभिक चरण: प्रोजेक्ट अभी सिर्फ फिजिबिलिटी रिपोर्ट के शुरुआती दौर में है। अभी तक कोई टेंडर या काम शुरू होने की समय-सीमा तय नहीं हुई है।
- भौगोलिक और तकनीकी मुश्किलें: हिमालयी क्षेत्र में बड़े बांध बनाना हमेशा से मुश्किल रहा है। भारी मशीनरी को दुर्गम इलाकों में पहुँचाना और पर्यावरण संबंधी क्लियरेंस हासिल करना बड़ी चुनौती है।
- सामाजिक विरोध: स्थानीय स्तर पर जमीन अधिग्रहण और विस्थापन को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो प्रोजेक्ट में देरी का मुख्य कारण बन सकते हैं।
आने वाले समय में फिजिबिलिटी रिपोर्ट्स की फाइनल रिपोर्ट और फंडिंग मॉडल की घोषणा इस प्रोजेक्ट के भविष्य को तय करेगी।
