देश में बिजली की भारी मांग और मानसून की बाधाओं के चलते कोयले की सप्लाई प्रभावित हुई है। वर्तमान में 59 थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है, जिसे देखते हुए Coal India Limited ने लॉजिस्टिक्स बढ़ाने और नियमों में ढील देने का फैसला लिया है।
भारत का ऊर्जा क्षेत्र इस वक्त एक कठिन दौर से गुजर रहा है। सितंबर 2026 की शुरुआत तक, देश के 59 थर्मल पावर प्लांट्स ऐसे हैं जहां कोयले का स्टॉक उनकी जरूरत का 25% से भी कम रह गया है। इस संकट की मुख्य वजह मई में दर्ज किए गए 270 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी बिजली की लगातार मांग और मानसून के कारण लॉजिस्टिक्स में आ रही रुकावटें हैं।
सप्लाई सुधारने के लिए सरकार की इमरजेंसी रणनीति
कोयला मंत्रालय और Coal India Limited (CIL) ने स्थिति को संभालने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए रेल रैक की तैनाती को तेजी से बढ़ाया गया है। जहां 3 सितंबर को 370 रैक का इस्तेमाल हो रहा था, वहीं 6 सितंबर तक यह संख्या बढ़कर 444 रैक प्रतिदिन हो गई। इसके अलावा, सरकार ने मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स में ढील दी है, ताकि पावर प्लांट जरूरत से ज्यादा कोयला उठा सकें और किसी भी तरह की शटडाउन की स्थिति न आए।
डेटा में छिपा संकट
निवेशकों के लिए सेक्टर का डेटा गौर करने वाला है। अगस्त 2026 में कोयले की कुल निकासी यानी ऑफटेक 5.5% बढ़कर 6.06 करोड़ टन रही, लेकिन भारी बारिश की वजह से उत्पादन 5.7% गिरकर 4.75 करोड़ टन पर आ गया। यह अंतर बताता है कि क्यों माइन्स पर कोयले का स्टॉक तेजी से घट रहा है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
बाजार की नजर अब इस बात पर है कि मानसून के सामान्य होने के साथ माइनिंग ऑपरेशंस कितनी तेजी से रिकवर करते हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या पावर प्लांट आने वाले पीक डिमांड सीजन से पहले अपना बफर स्टॉक वापस बना पाएंगे या नहीं। साथ ही, सप्लाई में उतार-चढ़ाव का असर DISCOMs के मार्जिन और बिजली उत्पादन की लागत पर भी पड़ सकता है।
