India Coal Power Generation: बिजली संकट के बीच कोयले का बड़ा धमाका, प्रोडक्शन **25.7%** बढ़ा

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Coal Power Generation: बिजली संकट के बीच कोयले का बड़ा धमाका, प्रोडक्शन **25.7%** बढ़ा

भारत में कोयले से बिजली उत्पादन ने **3 साल** का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अक्टूबर **2026** में इसमें **25.7%** की बड़ी उछाल आई है, क्योंकि हाइड्रोपावर में **26%** की गिरावट के बाद थर्मल प्लांट्स पर पूरा दबाव आ गया है।

भारत के पावर जनरेशन सेक्टर के लिए अक्टूबर 2026 का महीना एक बड़ी परीक्षा लेकर आया। ग्रिड-इंडिया (Grid-India) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कोयले से बिजली का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 25.7% बढ़ा है। यह पिछले 3 सालों में दर्ज की गई सबसे तेज ग्रोथ है। इसकी मुख्य वजह हाइड्रोपावर जनरेशन में आई 26% की भारी गिरावट है, जो साल 2024 के बाद से सबसे बड़ा स्तर है।

उत्पादन बढ़ने के पीछे की असली वजह

इस स्थिति के पीछे 'एल नीनो' (El Niño) मौसम पैटर्न का बड़ा हाथ है, जिसने जलाशयों में पानी के स्तर को काफी कम कर दिया है। जैसे-जैसे हाइड्रोपावर उत्पादन घटा, औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए थर्मल सेक्टर को मोर्चा संभालना पड़ा। नतीजतन, अक्टूबर में भारत के कुल बिजली मिक्स में कोयले की हिस्सेदारी बढ़कर 71.7% हो गई, जो सितंबर में 66.03% थी।

थर्मल प्लांट्स पर बढ़ा भारी दबाव

हालांकि इस कदम से बिजली कटौती को रोकने में मदद मिली, लेकिन इससे थर्मल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव बन गया। संकट के चरम पर, 191 में से 100 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया था। इसे देखते हुए सरकार ने 112 कैप्टिव थर्मल प्लांट्स को दिसंबर 2026 तक अधिकतम क्षमता पर काम करने का आदेश दिया है।

Coal India Limited ने भी अक्टूबर में अपने प्रोडक्शन में 19.3% की साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की है ताकि कोयले की आपूर्ति में कमी न आए।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए यह डेटा एक चेतावनी है कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रति कितना संवेदनशील है। जब बारिश कम होती है, तो ग्रिड पूरी तरह कोयले पर निर्भर हो जाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर रिस्क बढ़ जाता है। निवेशकों को आने वाले समय में प्लांट्स के फ्यूल इन्वेंट्री लेवल और माइनिंग कंपनियों की उत्पादन क्षमता पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि थर्मल एसेट्स फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बैकबोन बने हुए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.