एनर्जी थिंक टैंक Ember की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो वैश्विक ऊर्जा रुझानों में बड़े परिवर्तनों का संकेत देता है।
India में जीवाश्म ईंधन से उत्पादन 52 टेरावाट-घंटे (TWh) की गिरावट के साथ 3.3% कम हुआ, जो चार साल की पोस्ट-पेंडमिक ग्रोथ के बाद आया है। इसका मुख्य कारण रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) का रिकॉर्ड विस्तार है। सोलर पावर जनरेशन 53 TWh यानी 37% बढ़ा, जबकि India ने 2025 में अमेरिका से अधिक सोलर क्षमता स्थापित की। विंड पावर ने 22 TWh और हाइड्रो पावर ने 21 TWh का योगदान दिया, जो अच्छे मॉनसून की वजह से संभव हुआ। कुल मिलाकर, रिन्यूएबल्स की ग्रोथ डिमांड ग्रोथ से दोगुनी रही।
India की कुल बिजली मांग पिछले साल की तुलना में धीमी होकर 2.4% रही। इसका कारण हल्के गर्मी के तापमान और धीमी औद्योगिक गतिविधि थी। नतीजतन, कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन में 44 TWh या 2.9% की कमी आई। India के बिजली मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 2024 के 75% से घटकर 71% रह गई।
China में भी जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन में गिरावट देखी गई। यह बड़े बदलाव वैश्विक ऊर्जा सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक घटनाओं के बीच। India और China जैसे बड़े देशों का जीवाश्म ईंधन से दूर जाना वैश्विक ऊर्जा ट्रांजीशन (Energy Transition) को तेज कर रहा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों पर बड़ा असर पड़ेगा।
