BRICS समिट के बाद भारत और चीन ने एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर हाथ मिलाया है। पेट्रोलियम मिनिस्टर Hardeep Singh Puri ने China National Petroleum Corporation के चेयरमैन Dai Houliang के साथ मुलाकात कर सप्लाई चेन की चुनौतियों पर चर्चा की।
ऊर्जा सुरक्षा पर नई रणनीति
18वीं BRICS समिट के समापन के बाद, भारत और चीन के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर एक हाई-लेवल चर्चा हुई है। 11 सितंबर 2026 को भारत के पेट्रोलियम मिनिस्टर Hardeep Singh Puri ने China National Petroleum Corporation (CNPC) के चेयरमैन Dai Houliang से मुलाकात की। यह बातचीत ग्लोबल ऑइल और गैस मार्केट की उन चुनौतियों को संबोधित करने के लिए है, जो हाल के दिनों में वेस्ट एशिया में शिपिंग रूट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में आई बाधाओं के कारण बढ़ गई हैं।
कूटनीति और भविष्य की राह
यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई कूटनीतिक चर्चाओं के साथ हुई है, जो दोनों देशों के बीच बेहतर होते रिश्तों का संकेत देती है। भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑइल इंपोर्टर्स में से हैं, इसलिए उनका मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन के झटकों (shocks) से निपटना है। दोनों देश न केवल पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खरीद, बल्कि ग्रीन एनर्जी और लो-कार्बन टेक्नोलॉजी में भी साथ काम करने पर विचार कर रहे हैं।
इकोनॉमिक इम्पैक्ट
भारत के लिए ऊर्जा सप्लाई की स्थिरता सीधे तौर पर इकोनॉमिक ग्रोथ से जुड़ी है। ग्लोबल एनर्जी कीमतों में उतार-चढ़ाव का मतलब है—देश के लिए महंगाई और बढ़ता हुआ इंपोर्ट बिल। दोनों देशों की इस एलाइनमेंट का लक्ष्य बाहरी सप्लाई शॉक्स के प्रति अपनी संवेदनशीलता को कम करना है।
हालांकि, इन्वेस्टर्स को ध्यान रखना होगा कि भारत और चीन के रिश्ते अभी भी जटिल हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जुड़े जोखिम आने वाले समय में एनर्जी मार्केट पर दबाव बना सकते हैं। इस पार्टनरशिप की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश इन जियोपॉलिटिकल रिस्क को कैसे हैंडल करते हैं।
