पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कर दिया है कि भारत में पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग **20%** से ज्यादा नहीं बढ़ाई जाएगी। इस फैसले से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें इंजन तकनीक में बड़े बदलाव नहीं करने होंगे।
ऑटो सेक्टर को मिली बड़ी राहत
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस ऐलान से ऑटोमोबाइल सेक्टर में छाई अनिश्चितता खत्म हो गई है। अब तक कंपनियां इस बात को लेकर सतर्क थीं कि क्या उन्हें E85 या E100 जैसे उच्च स्तरों के लिए इंजन में बड़े निवेश करने होंगे। इस कैप के तय होने से टाटा मोटर्स, टोयोटा और हुंडई जैसी कंपनियों को अपने मौजूदा इंजन प्लेटफॉर्म पर काम करने की आजादी मिली है। निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे कंपनियों पर अचानक आने वाले R&D खर्च का दबाव कम हो गया है।
शुगर और इथेनॉल कंपनियों पर असर
इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों, जैसे बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और डालमिया भारत शुगर के निवेशकों के लिए यह स्पष्टता जरूरी थी। पिछले कुछ सालों में इन कंपनियों ने ब्लेंडिंग बढ़ने की उम्मीद में अपनी क्षमता का तेजी से विस्तार किया था। अब 20% की सीमा तय होने से इन कंपनियों का ध्यान आक्रामक विस्तार की जगह अपनी क्षमता को स्थिर करने पर रहेगा। अब इनकी प्रॉफिटेबिलिटी सरकारी लक्ष्य के बजाय गन्ने की उपलब्धता और ग्लोबल शुगर प्राइस पर निर्भर करेगी।
इंजन डैमेज पर क्या बोले मंत्री?
मंत्री ने इंजन खराब होने की उन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि इथेनॉल के कारण इंजन डैमेज हो रहे हैं। सरकार ने साफ किया कि कुछ तकनीकी समस्याएं परिवहन के दौरान ईंधन के गलत हैंडलिंग के कारण हुईं, न कि ईंधन की गुणवत्ता के कारण।
इकोनॉमी को कितना फायदा?
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 20% ब्लेंडिंग के लक्ष्य तक पहुंचने से देश ने ₹1.6 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है, जिसमें से ₹1.4 लाख करोड़ सीधे कृषि क्षेत्र में पहुंचे हैं। यह रणनीति देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है।
