एनर्जी सिक्योरिटी पर भारत का बड़ा कदम
मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव और शिपिंग रूट्स के बाधित होने के चलते भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसी के मद्देनज़र, देश के रिफाइनर्स (Refiners) एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। अगले महीने के लिए करीब 60 मिलियन बैरल रशियन क्रूड ऑयल (Russian Crude Oil) की खरीद की जा रही है। यह वॉल्यूम मार्च की खरीद के बराबर है और फरवरी की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है।
अमेरिका की छूट और शिपिंग रूट का संकट
इस खरीद की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट संकट है, जिसने हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में गंभीर बाधाएं पैदा कर दी हैं। हालांकि, अमेरिका की ओर से मिली छूट (Waiver) ने इस खरीद को फिर से मुमकिन बना दिया है, और यह छूट तब तक जारी रहने की उम्मीद है जब तक शिपिंग रूट बाधित रहेंगे। Mangalore Refinery & Petrochemicals Ltd. और Hindustan Mittal Energy Ltd. जैसी कंपनियां, जिन्होंने दिसंबर में रशियन तेल खरीदना बंद कर दिया था, अब फिर से बाज़ार में लौट आई हैं। भारत वेनेजुएला (Venezuela) से भी अधिक कच्चा तेल खरीद रहा है, अप्रैल के लिए 8 मिलियन बैरल की योजना है, जो अक्टूबर 2020 के बाद सबसे अधिक है।
रूस की कमाई बढ़ी, भारत पर महंगाई का खतरा
भारत की बढ़ी हुई मांग और वैश्विक कीमतों के चलते, रूस के तेल उद्योग को भारी मुनाफा हो रहा है। मॉस्को (Moscow) के कच्चे तेल निर्यात से होने वाली कमाई मार्च 2022 के बाद सबसे अधिक है। इन शिपमेंट पर ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की तुलना में $5 से $15 प्रति बैरल तक का प्रीमियम होने के बावजूद, डिस्काउंट के कारण रशियाई क्रूड खरीदारों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
भारत अपनी 80% से अधिक ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे वह वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अमेरिका द्वारा सैंक्शन (Sanctions) को लेकर नरमी बरतने के बावजूद, इन खरीदों में सैंक्शन प्रवर्तन और बदलते अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े जोखिम शामिल हैं। मिडिल ईस्ट के तनावों के कारण बढ़ी हुई तेल की कीमतें भारत में महंगाई (Inflation) को भी बढ़ा सकती हैं।