त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकारी रिफाइनरियों ने LPG के दैनिक उत्पादन को **20%** बढ़ाकर **44,000 टन** कर दिया है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई की दिक्कतों के चलते भारत अब लंबी अवधि के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ करार करने की तैयारी में है।
त्योहारी सीजन में गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने कमर कस ली है। अगस्त के औसत उत्पादन के मुकाबले अब रोजाना 44,000 टन LPG का उत्पादन किया जा रहा है।
पर्शियन गल्फ का लॉजिस्टिक्स संकट
मिडिल ईस्ट के रूट पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण भारत ने यह कदम उठाया है। वहां हालिया ट्रांजिट मुश्किलों की वजह से कार्गो डिलीवरी में देरी हो रही थी, जिससे इन्वेंटरी लेवल पर दबाव दिख रहा था। हालांकि अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने अक्टूबर की जरूरतें पूरी करने का भरोसा दिया है, लेकिन भारत अब अपनी निर्भरता कम करने पर जोर दे रहा है।
अमेरिका की ओर झुकाव
भविष्य के जोखिम को भांपते हुए भारत सरकार अमेरिकी निर्यातकों के साथ लॉन्ग-टर्म सप्लाई एग्रीमेंट साइन करने की योजना बना रही है। लक्ष्य यह है कि अगले साल तक भारत के कुल LPG आयात का 20% हिस्सा अमेरिका से आए। पिछले साल यह आंकड़ा महज 6% था, जो अब तेजी से बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के निवेशकों की नजर मार्जिन पर टिकी है। अमेरिका से आयात करने पर शिपिंग की दूरी अधिक होने के कारण फ्रेट कॉस्ट (Freight Cost) बढ़ सकती है। हालांकि, रिटेल कीमतें सरकारी नियंत्रण में रहती हैं, इसलिए बाजार यह देख रहा है कि क्या लागत का यह बोझ कंपनियों के मुनाफे को कम करेगा या इसे कीमतों के जरिए मैनेज किया जाएगा। सर्दियों के दौरान ग्लोबल हीटिंग डिमांड बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव रह सकता है, जिस पर निवेशकों को करीबी नजर रखनी चाहिए।
