दाम बढ़ने से सरकारी पंपों पर उमड़ी भीड़
भारत सरकार सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है, क्योंकि Nayara Energy और Shell जैसी प्राइवेट कंपनियां अपने दामों में भारी बढ़ोतरी कर रही हैं। इस वजह से Nayara Energy की बिक्री में 30% से 46% तक की गिरावट आई है, और Shell के डीजल की बिक्री 77% तक गिर गई है। वहीं, सरकारी आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री में लगभग 9% की बढ़ोतरी देखी गई है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राइवेट कंपनियों द्वारा थोक (bulk) डीजल और रिटेल (retail) डीजल के बीच लगभग ₹40-42 प्रति लीटर के बड़े अंतर के कारण, ग्राहक अब सस्ते दामों के लिए सरकारी पंपों का रुख कर रहे हैं। सरकारी कंपनियां घाटा उठाकर भी कीमतें स्थिर बनाए हुए हैं।
सरकार का बड़ा बयान: पर्याप्त स्टॉक मौजूद
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भारत के पास क्रूड ऑयल, पेट्रोल, डीजल और नेचुरल गैस का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र की बढ़ती मांग भी ईंधन की बिक्री में बढ़ोतरी का एक अहम कारण है। सरकार वितरण चैनलों की निगरानी कर रही है और किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिए जांच भी की जा रही है। भारत के पास अगले 2 महीनों के लिए पर्याप्त ईंधन आपूर्ति है और कुल 74 दिनों का भंडार मौजूद है।
बाजार की चाल और ग्राहकों का व्यवहार
प्राइवेट रिटेलर्स वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लागत के अनुसार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है। जहां Nayara Energy और Shell अप्रैल में अपना मार्केट शेयर खो चुके हैं, वहीं RIL-BP जैसे कुछ प्राइवेट प्लेयर्स ने बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है। कृषि क्षेत्र की मांग भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है।
सरकारी कंपनियों पर वित्तीय दबाव
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि वे रिटेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए लागत से कम दाम पर ईंधन बेच रही हैं। खबरों के मुताबिक, हाल ही में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से पहले रोज लगभग ₹750 करोड़ का घाटा हो रहा था, जो ₹1,000 करोड़ तक पहुंच गया था। इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी वित्तीय सेहत पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या?
सरकार यह सुनिश्चित करने की योजना बना रही है कि ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और थोक ग्राहकों को उनके सामान्य आपूर्ति चैनलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कृषि क्षेत्र की निरंतर मांग और प्राइवेट कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीति बाजार को प्रभावित करती रहेगी। सरकार सक्रिय निगरानी और सुनिश्चित भंडार के साथ स्थिरता बनाए रखने का लक्ष्य रखती है।
