सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत **₹1.86 लाख करोड़** का निवेश पावर ट्रांसमिशन को अपग्रेड करने और **50 GWh** बैटरी स्टोरेज जोड़ने के लिए किया जाएगा, जिससे **2035** तक **900 GW** नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
केंद्रीय कैबिनेट ने पावर ग्रिड को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए ₹1,86,405 करोड़ के निवेश पर मुहर लगा दी है। यह प्रोजेक्ट 135 गीगावाट नई रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सोलर और विंड पावर के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए 50 गीगावाट-आवर की बैटरी एनर्जी स्टोरेज कैपेसिटी तैयार करना है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह ऐलान उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो पावर ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल एनर्जी में काम कर रही हैं। Power Grid Corporation of India जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह लंबे समय तक रेवेन्यू की गारंटी जैसा है। इसके अलावा, बैटरी स्टोरेज के लिए तय ₹50,000 करोड़ का आवंटन उन टेक्नोलॉजी कंपनियों को लाभ पहुंचा सकता है जो ग्रिड-स्केल स्टोरेज सॉल्यूशन प्रदान करती हैं।
रिस्क और चुनौतियां
इन्वेस्टर्स को जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और राइट-ऑफ-वे (Right-of-Way) जैसी पुरानी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिनकी वजह से अक्सर बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी होती है और लागत बढ़ जाती है। साथ ही, बैटरी स्टोरेज की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को कैसे मैनेज करती हैं और ग्रिड को कितना किफायती बना पाती हैं।
फंड और टेंडर का गणित
सरकार इस योजना में ₹54,082 करोड़ की केंद्रीय सहायता (Financial Assistance) देगी। प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में 'टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग' का इस्तेमाल होगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेड के लिए 'कॉस्ट-प्लस' मॉडल अपनाया जाएगा। मार्केट की नजर अब इस पर है कि टेंडर कब जारी होते हैं और स्टेट-लेवल यूटिलिटीज काम को कितनी तेजी से आगे बढ़ाती हैं।
