India Oil Storage Expansion: देश की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बूस्ट, ₹14,527 करोड़ की नई स्टोरेज क्षमता मंजूर

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Oil Storage Expansion: देश की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बूस्ट, ₹14,527 करोड़ की नई स्टोरेज क्षमता मंजूर

सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के दूसरे चरण को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत ओडिशा और कर्नाटक में **6.5 मिलियन टन** की अतिरिक्त कच्चा तेल भंडारण क्षमता जोड़ी जाएगी। **₹14,527 करोड़** की इस परियोजना में एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया जाएगा।

Detailed Coverage

एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बड़ा कदम

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठा रहा है। सरकार ने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए ₹14,527 करोड़ के निवेश को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी से 6.5 मिलियन टन कच्चा तेल स्टोर करने की अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी। यह कदम भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाले उतार-चढ़ावों से अपनी इकोनॉमी को सुरक्षित रखना चाहता है।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल

इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। सरकार इस मॉडल में प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए 60% तक की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) देगी। इसका मकसद प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकार इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में एक अहम भागीदार बनी रहे।

ओडिशा और कर्नाटक में नई स्टोरेज फैसिलिटीज

इस विस्तार में दो प्रमुख जगहों पर फोकस किया जाएगा। ओडिशा में 4 मिलियन टन की क्षमता वाला स्टोरेज प्लांट बनेगा, जबकि कर्नाटक में 2.5 मिलियन टन की क्षमता वाली फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। ये नई साइटें पहले से मौजूद फेज-1 इंफ्रास्ट्रक्चर में जुड़ेंगी। फेज-1 के तहत, सरकारी कंपनी इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) ने विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर में कुल 5.33 मिलियन टन की स्टोरेज कैपेसिटी बनाई थी, जो 2016 से 2018 के बीच चालू हुई थी।

एनर्जी सोर्स का डाइवर्सिफिकेशन

सिर्फ फिजिकल स्टोरेज बढ़ाने के अलावा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय सप्लाई साइड को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों को बढ़ाया है, जिसमें देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है। इसी तरह, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सोर्सिंग भी 6 देशों से बढ़कर 15 देशों तक पहुंच गई है। ईंधन के आयात के लिए देशों में विविधता लाकर, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता के जोखिम को कम करना चाहता है।

आगे क्या? (Future Monitorables)

सरकार नेचुरल गैस, इथेनॉल, बायोडीजल और सीएनजी (CNG) को बढ़ावा देकर एनर्जी ट्रांजिशन पर भी जोर दे रही है, ताकि इंपोर्टेड कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हो सके। निवेशकों के लिए, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन की गति एक अहम फैक्टर होगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से प्राइवेट पार्टनर्स के लिए बिडिंग प्रोसेस, जमीन अधिग्रहण और निर्माण शुरू होने की समय-सीमा जैसे अपडेट्स पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ये प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल एफिशिएंसी और एनर्जी सेक्टर पर इसके प्रभाव को निर्धारित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.