पेट्रोलियम मंत्रालय ने CNG और बायोगैस के लिए मोबाइल रिफ्यूलिंग यूनिट्स को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से माइनिंग, पोर्ट्स और रेल यार्ड जैसे औद्योगिक इलाकों में ईंधन पहुंचाना आसान होगा और कंपनियों का भारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बचेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए अब मोबाइल रिफ्यूलिंग यूनिट्स के जरिए CNG और कंप्रेस्ड बायोगैस की आपूर्ति की अनुमति दे दी है। इस कदम से माइनिंग, पोर्ट्स, रेल यार्ड्स और इनलैंड वॉटरवेज जैसी जगहों पर भारी मशीनरी चलाने वाली कंपनियों को फायदा होगा। अब उन्हें ईंधन के लिए फिक्स्ड स्टेशन तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे डीजल से क्लीनर फ्यूल की तरफ स्विच करना आसान हो जाएगा।
गैस कंपनियों के लिए 'गेम चेंजर'
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ी समस्या का समाधान है। अब तक कंपनियों को किसी रिमोट एरिया में सर्विस देने के लिए वहां पर महंगे परमानेंट फिलिंग स्टेशन बनाने पड़ते थे, जिसमें भारी पूंजी (Capital Expenditure) लगती थी। मोबाइल यूनिट्स के जरिए अब कंपनियां बिना किसी बड़े निवेश के सीधे साइट पर जाकर डिमांड पूरी कर सकती हैं। यह 'एजाइल' मॉडल कंपनियों को पहले डिमांड टेस्ट करने और फिर निवेश करने की सुविधा देता है।
सुरक्षा और नियम
हालांकि, सरकार ने इस पर सख्त बंदिशें भी रखी हैं। ये मोबाइल यूनिट्स सार्वजनिक रिटेल या सड़क किनारे डिस्पेंसिंग के लिए नहीं होंगी। इनका मालिकाना हक केवल अधिकृत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास ही होगा। सुरक्षा के लिहाज से इन्हें 250 बार के अधिकतम ऑपरेटिंग प्रेशर और इमरजेंसी शट-ऑफ वाल्व जैसे मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बड़ी गैस कंपनियां इसे कितनी जल्दी और किस स्केल पर लागू करती हैं। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो औद्योगिक इलाकों में गैस की खपत में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है, जो सीधे तौर पर आने वाले क्वार्टर्स में इन कंपनियों के सेल्स वॉल्यूम को बूस्ट कर सकता है।
