ऑयल मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने साफ कर दिया है कि भारत ग्लोबल डीजल सप्लाई में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक रिफाइनिंग कैपेसिटी को **320 MTPA** तक पहुंचाना है, जो Reliance Industries, Indian Oil, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
भारत अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऑयल मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, देश का लक्ष्य अगले एक साल में रिफाइनिंग कैपेसिटी को 290 MTPA करने का है, जिसे 2030 तक 320 MTPA तक ले जाया जाएगा। यह इंफ्रास्ट्रक्चर पुश घरेलू जरूरतों के साथ-साथ विदेशी कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
मौजूदा समय में भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 267 MTPA है। इस विस्तार का सीधा फायदा IOC, BPCL, HPCL और Reliance Industries जैसी कंपनियों को मिलना तय है। बता दें कि भारत दुनिया के कुल सी-बॉर्न (seaborne) डीजल शिपमेंट का करीब 10% हिस्सा संभालता है। रूस और यूरोप के बीच बदलती ट्रेड पॉलिसीज और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता के बीच भारत ने एक बड़ी सप्लाई गैप को भरने का काम किया है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह कैपेसिटी विस्तार लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का संकेत है। हालांकि, इन रिफाइनर्स का मुनाफा क्रूड ऑयल के दाम और ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर निर्भर करता है, जो वेस्ट एशिया की स्थिति और ग्लोबल डिमांड पर टिके होते हैं।
ग्लोबल मार्केट में भारत की साख
मॉरीशस के साथ हाल ही में हुआ 5 साल का डीजल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट भारत की बढ़ती साख का प्रमाण है। इस तरह के एग्रीमेंट्स से स्पॉट मार्केट की अस्थिरता से बचाव होता है और कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के लिए फिक्स्ड मार्केट मिल जाता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इतने बड़े कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स को कैसे एग्जीक्यूट करती हैं और अपने कर्ज के बोझ को कैसे मैनेज करती हैं।
