भारत का तेल (Oil) से बड़ा दांव! वैश्विक सप्लाई में मदद, पर देश में क्यों मची किल्लत?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का तेल (Oil) से बड़ा दांव! वैश्विक सप्लाई में मदद, पर देश में क्यों मची किल्लत?
Overview

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के नेतृत्व में **400 मिलियन बैरल** से अधिक तेल भंडार (Oil Reserves) जारी करने के ऐतिहासिक कदम में भारत भी शामिल हो गया है। इसका मकसद दुनिया भर में बढ़ती कीमतों को काबू करना है। लेकिन, इस कदम से भारत की अपनी एनर्जी सप्लाई की चिंताएं भी सामने आ गई हैं, और सरकार घरेलू स्तर पर इंतजामों को मजबूत करने में जुट गई है।

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अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने ग्लोबल मार्केट को सहारा देने के लिए 400 मिलियन बैरल का अब तक का सबसे बड़ा तेल भंडार (Oil Reserves) जारी करने का ऐलान किया है। यह कदम भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Conflict) के चलते तेजी से बढ़ रही कीमतों को काबू करने के लिए उठाया गया है। इतिहास में यह सबसे बड़ी सप्लाई है, जो 2022 में जारी 182 मिलियन बैरल से कहीं ज्यादा है। इसका मुख्य उद्देश्य शिपिंग रूट्स, खासकर हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर सप्लाई की दिक्कतों को दूर करना है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $90 प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं।

भारत, जो IEA का एसोसिएट सदस्य है, इस वैश्विक प्रयास में सहयोग तो कर रहा है, लेकिन यह कदम देश की एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) की बड़ी कमजोरी को भी उजागर करता है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 89% कच्चा तेल (Crude Oil) आयात (Import) करता है। यही नहीं, देश के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का करीब आधा हिस्सा और 90% से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) मध्य पूर्व (Middle East) से आता है, जो अक्सर हॉरमूज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑयल कंज्यूमर (Oil Consumer) के तौर पर, भारत इन सप्लाई लाइन्स पर भारी निर्भर है।

अपनी एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने के लिए, सरकार ने आम जनता से फ्यूल (Fuel) बचाने और पैनिक बाइंग (Panic Buying) से बचने की अपील की है। इससे भी गंभीर बात यह है कि सरकार ने इमरजेंसी पावर्स (Emergency Powers) का इस्तेमाल करते हुए ऑयल रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने और इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को इसकी सप्लाई सीमित करने का निर्देश दिया है। यह कदम देश की बढ़ती इकोनॉमी (Growing Economy) को ऊर्जा देने और घरों की मांग को पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में, अगर सप्लाई में लंबी दिक्कतें आती हैं, तो रेस्टोरेंट और होटलों जैसे कमर्शियल यूजर्स को LPG की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

IEA द्वारा तेल भंडार जारी करना एक अल्पकालिक (Short-term) राहत दे सकता है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हॉरमूज जलडमरूमध्य बंद रहता है तो यह लंबे समय तक होने वाले सप्लाई लॉस की भरपाई नहीं कर पाएगा। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और भारत के इंपोर्ट बिल (Import Bill) में इजाफे का खतरा बना रहेगा। वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuels) या सप्लायर्स की ओर बढ़ना अक्सर महंगा पड़ता है, जिससे देश के इंपोर्ट बिल और महंगाई (Inflation) पर और बुरा असर पड़ सकता है। अगर सप्लाई की दिक्कतें बनी रहीं, तो एनर्जी सिक्योरिटी की ये कमजोरियां व्यापक आर्थिक अस्थिरता (Economic Instability) को जन्म दे सकती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.