भारत ने 2026 की पहली छमाही में रिकॉर्ड **29 गीगावाट (GW)** नई सौर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। इसके साथ ही देश की कुल रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता अब **288 GW** पर पहुंच गई है। इस दौरान सौर ऊर्जा में **43%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जबकि पवन ऊर्जा में **16%** की कमी आई। यह ग्रोथ भारत के 2030 तक **500 GW** गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य के लिए बेहद अहम है।
सौर ऊर्जा का तूफानी प्रदर्शन
2026 की पहली छमाही में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। देश ने कुल 29 GW नई सौर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक देश की कुल रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता 288 GW हो गई है।
सौर ऊर्जा इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रही, जिसमें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 43% की ग्रोथ दर्ज की गई। यूटिलिटी-स्केल सौर प्रोजेक्ट्स से 19 GW नई क्षमता जुड़ी, जो पिछले साल से 32% ज़्यादा है। वहीं, रूफटॉप सोलर सेगमेंट ने 6.4 GW क्षमता जोड़कर सबको चौंका दिया। 'पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना' जैसी सरकारी पहलों के कारण इसमें 104% की भारी उछाल आई है, जिसने घरों में सोलर पावर अपनाने को बढ़ावा दिया है।
गुजरात आगे, राजस्थान-तमिलनाडु भी पीछे नहीं
स्वच्छ ऊर्जा के मामले में गुजरात सबसे आगे रहा, जिसने 7.6 GW सौर और 1.2 GW पवन ऊर्जा क्षमता में योगदान दिया। इसके बाद राजस्थान ने 6.6 GW सौर क्षमता जोड़ी, और तमिलनाडु ने 2.4 GW का इजाफा किया।
पवन ऊर्जा में गिरावट का दौर
जहां सौर ऊर्जा ने कमाल किया, वहीं पवन ऊर्जा सेक्टर पर दबाव दिखा। 2025 की पहली छमाही के 3.5 GW की तुलना में, इस बार पवन ऊर्जा क्षमता में 16% की कमी आई और यह घटकर 2.9 GW रह गई। पवन प्रोजेक्ट्स में यह सुस्ती इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी दिक्कतों, जैसे ज़मीन अधिग्रहण और ट्रांसमिशन लाइनों की देरी को उजागर करती है।
2030 के लक्ष्य की राह
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी मिक्स में करीब 56% सौर ऊर्जा और 20% पवन ऊर्जा का हिस्सा है। सरकार 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य हासिल करने पर ज़ोर दे रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारत कुल 47 GW नई सौर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ सकता है। निवेशकों के लिए, इस सेक्टर का भविष्य बड़े प्रोजेक्ट्स के सफल क्रियान्वयन, सौर मॉड्यूल के लिए कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता और ग्रिड में रिन्यूएबल पावर के सुचारू प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
