सरकार ने LPG की निर्भरता कम करने के लिए 21 लाख घरों को PNG में शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता और बढ़ते इम्पोर्ट बिल को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर अस्थिरता के चलते कुकिंग फ्यूल का आयात मुश्किल और महंगा हो गया है। भारत ने अपने आयात के स्रोतों में बदलाव करते हुए अब 73% से अधिक LPG का आयात अमेरिका से करना शुरू कर दिया है। हालांकि, लंबी दूरी तय करने के कारण माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ने से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है।
सरकारी खजाने पर बोझ और बदलाव
जुलाई 2026 तक, सरकारी तेल कंपनियों को LPG सेल्स पर ₹59,000 करोड़ से अधिक का 'अंडर-रिकवरी' या नुकसान उठाना पड़ा है। इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार ने अब पाइप नेचुरल गैस (PNG) के नेटवर्क को बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि सब्सिडी की भारी लागत से बचा जा सके।
CGD कंपनियों के लिए बड़ी खबर
सरकार ने 'Liquefied Petroleum Gas (Regulation of Supply and Distribution) Amendment Order, 2026' नोटिफाई कर दिया है। नई गाइडलाइन्स के तहत, उन इलाकों में जहां पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है, वहां घरों को दोहरे कनेक्शन (LPG और PNG) रखने की अनुमति नहीं होगी। यह बदलाव Indraprastha Gas और Adani Total Gas जैसी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि इससे इनके वॉल्यूम में सीधा उछाल देखने को मिलेगा।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, 21 लाख घरों को जोड़ना एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौती है। इन कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल क्षमता तेजी से बढ़ानी होगी, जिसमें पाइपलाइन बिछाने का भारी खर्च शामिल है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनियां बिना किसी देरी के इस विस्तार को पूरा कर पाएंगी, क्योंकि नेचुरल गैस की कीमतें ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील बनी रहती हैं।
