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LPG संकट का भारत ने उठाया फायदा: गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से होगा विस्तार, आयात पर निर्भरता घटेगी

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AuthorMehul Desai|Published at:
LPG संकट का भारत ने उठाया फायदा: गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से होगा विस्तार, आयात पर निर्भरता घटेगी
Overview

दुनिया भर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई में आई दिक्कतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) यानी पाइपलाइन गैस नेटवर्क के विस्तार को पंख लगा दिए हैं। सरकार इस 'LPG संकट' को एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है ताकि महंगे LPG आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके और सब्सिडी के बोझ को भी घटाया जा सके।

संकट से निकली गैस नेटवर्क विस्तार की राह

हाल के वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने भारत के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार को काफी तेज कर दिया है। सरकार इस समय आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है ताकि सीमित LPG सप्लाई को सिर्फ घरों तक पहुँचाया जा सके और ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क की ओर तेजी से मोड़ा जा सके। नई नीति के तहत, जिन ग्राहकों के पास तीन महीने के अंदर पाइपलाइन गैस का कनेक्शन लेने का विकल्प होगा, उन्हें LPG की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिस पर सालाना करीब $12 अरब (लगभग ₹1 लाख करोड़) का भारी खर्च आता है।

सब्सिडी का बोझ कम, इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार

इस CGD विस्तार को आसान बनाने के लिए नियामक सुधारों (Regulatory Reforms) को लागू किया जा रहा है, ताकि मुख्य बाधाओं को दूर किया जा सके। सरकार ने हाल ही में पाइपलाइन के लिए अप्रूवल की समय-सीमा को तेज कर दिया है, और कहा है कि अगर अधिकारी तय समय में जवाब नहीं देते हैं तो इसे मंजूरी मान लिया जाएगा। इसके अलावा, जमीन मालिकों और स्थानीय अधिकारियों को पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी एक्सेस देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने इस पहल को 'संकट को तेजी से नेटवर्क विस्तार के अवसर में बदलने' का एक तरीका बताया है।

पाइपलाइन गैस, जो बाजार दरों के करीब बिकती है, पर स्विच करने से सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ होगा। इससे सरकार का सब्सिडी बिल कम होगा, जो पिछले साल $3.4 अरब (लगभग ₹28,000 करोड़) था। साथ ही, सब्सिडी वाली LPG बेचने वाले रिटेलर्स के राजस्व नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि इन उपायों से 2030 तक भारत का LPG आयात 10% से 15% तक कम हो सकता है, जिससे सरकार पर वित्तीय दबाव भी घटेगा।

बाजार की उम्मीदें और प्रमुख कंपनियां

CGD मार्केट में भारी ग्रोथ की उम्मीद है। यह 2025 में अनुमानित USD 11.33 अरब (लगभग ₹94,520 करोड़) से बढ़कर 2031 तक USD 23.38 अरब (लगभग ₹1.95 लाख करोड़) तक पहुँच सकता है, जिसकी सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) 12.84% रहने का अनुमान है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ेगा, जिसकी सालाना ग्रोथ 2025 से 2031 के बीच 14.46% रहने की उम्मीद है, जो आक्रामक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का नतीजा है।

इस सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों में Indraprastha Gas Limited (IGL), Mahanagar Gas (MGL), GAIL Gas Limited, और Bharat Petroleum Corporation (BPCL) शामिल हैं। GAIL (India) Limited, जो एक बड़ी इंटीग्रेटेड नेचुरल गैस कंपनी है, के पास 11,500 किमी से ज्यादा की नेचुरल गैस पाइपलाइन का नेटवर्क है। मार्च 2026 तक, GAIL की मार्केट कैप करीब ₹90,736 करोड़ थी, और इसका P/E रेश्यो 11.84 था। Indraprastha Gas Limited (IGL) के लिए विश्लेषकों की 'Buy' कंसेंसस रेटिंग है और टारगेट प्राइस करीब ₹215.00 है। Mahanagar Gas (MGL) की कमाई पिछले पांच सालों में 12.8% सालाना बढ़ी है। वहीं, Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) की मार्केट कैप ₹121,997.76 करोड़ थी, और इसका टारगेट प्राइस करीब ₹400.75 था। हालांकि, हालिया स्टॉक प्रदर्शन में गिरावट देखी गई है: GAIL Ltd (GAIL) पिछले साल -23.57% नीचे है, और Indraprastha Gas (IGAS) -28.24% गिरा है। इन चुनौतियों के बावजूद, CGD सेक्टर में 2026 में 7% की खपत वृद्धि का अनुमान है, जो नेटवर्क विस्तार से प्रेरित होगी।

जोखिम और चुनौतियां

हालांकि इस विस्तार से सब्सिडी और आयात पर निर्भरता कम होने का साफ रास्ता दिख रहा है, लेकिन इसमें महत्वपूर्ण जोखिम भी शामिल हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष ने ग्लोबल LNG दरों को दोगुना कर दिया है, जिसका सीधा असर भारत के LNG आयात पर पड़ रहा है, जो CGD इंडस्ट्री की 40% जरूरतों को पूरा करता है। इस झटके की वजह से, अल्पावधि में CGD बिक्री वॉल्यूम में 8-10% की गिरावट आ सकती है, हालांकि ऊंची कीमतें लाभप्रदता को सहारा दे सकती हैं। भारत की नेचुरल गैस की खपत में जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान 7.5% की गिरावट भी देखी गई, जो 2024 में 13% की वृद्धि के विपरीत है। यह दर्शाता है कि मांग, सस्ते वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता और मौसम जैसी घटनाओं से प्रभावित हो सकती है। GAIL (India) Limited को अपने 0.05 के P/E रेश्यो के साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो सेक्टर के औसत से काफी कम है। BPCL पर INR 611.01 बिलियन का भारी कर्ज भी है।

भविष्य की राह

सरकार 2030 तक 35 मिलियन से 40 मिलियन कनेक्शन का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो इस ऊर्जा परिवर्तन के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि 2030 तक भारत के LPG आयात में 10% से 15% की कमी आएगी। CGD मार्केट 2026 से 2031 के बीच 12.84% CAGR से बढ़कर 2031 तक USD 23.38 अरब (लगभग ₹1.95 लाख करोड़) तक पहुँचने का अनुमान है। भू-राजनीतिक घटनाओं से अल्पावधि में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत में नेचुरल गैस की खपत का दीर्घकालिक दृष्टिकोण मजबूत बना हुआ है, जो सरकारी नीतियों और देश की ऊर्जा सुरक्षा की खोज का समर्थन करता है।

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