IOCL ने Q2 FY27 में शानदार प्रदर्शन करते हुए **₹22,503 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण संभव हुआ। हालांकि, ऑडिट कमेटी के निष्क्रिय होने से कंपनी पर गवर्नेंस रिस्क बढ़ गया है और फ्यूल सब्सिडी का बोझ भी अभी बरकरार है।
मुनाफे में जबरदस्त उछाल
Indian Oil Corporation (IOCL) ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही में शानदार रिकवरी की है। कंपनी ने ₹22,503 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया है, जो कि पिछली तिमाही के ₹1,411 करोड़ के नेट लॉस के मुकाबले एक बहुत बड़ी छलांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने कंपनी के रिफाइनिंग मार्जिन को सहारा दिया है।
ऑपरेशनल मजबूती
कंपनी ने अपनी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार किया है। रिफाइनरियों ने 105.8% की कैपेसिटी पर काम किया और 3.72 करोड़ टन कच्चे तेल को प्रोसेस किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 3% अधिक है। इसके अलावा, कंपनी का पाइपलाइन थ्रूपुट भी 7% बढ़कर 5.38 करोड़ टन पर पहुंच गया है। घरेलू मार्केट शेयर भी 41.5% से बढ़कर 42.7% हो गया है।
गवर्नेंस और सब्सिडी का रिस्क
अच्छे नतीजों के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। IOCL ने खुलासा किया है कि 28 मार्च, 2026 से कंपनी की ऑडिट कमेटी काम नहीं कर रही है। इसका मुख्य कारण बोर्ड में जरूरी संख्या में 'इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स' (Independent Directors) का न होना है। फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और इंटरनल कंट्रोल के लिहाज से यह एक बड़ा गवर्नेंस रिस्क है।
इसके साथ ही, LPG की बिक्री पर मिलने वाली अंडर-रिकवरी का मुद्दा भी कंपनी के लिए मुसीबत बना हुआ है। दूसरी तिमाही के अंत तक, कंपनी का कुल अंडर-रिकवरी घाटा ₹32,505.69 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कैश फ्लो पर दबाव डाल रहा है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
आने वाले समय में कंपनी के लिए 'इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स' की नियुक्ति सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। साथ ही, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और LPG सब्सिडी के बोझ का असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर आगे भी देखने को मिल सकता है।
