IOCL Q3 FY25-26 नतीजे: कर्ज़ और भारी Capex के बीच प्रॉफिटेबिलिटी पर छाया धुंध
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही और नौ महीनों के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Financial Results) पेश किए हैं। हालांकि, इन नतीजों में एक बड़ी कमी है – कंपनी ने प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT), प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) और रेवेन्यू (Revenue) जैसे अहम प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) के आंकड़े जारी नहीं किए हैं, जिससे कंपनी की असल वित्तीय परफॉरमेंस का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है।
कर्ज़ का भारी बोझ और ब्याज का भुगतान
जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें कंपनी पर कर्ज़ का भारी बोझ साफ दिख रहा है। 31 दिसंबर 2025 तक, IOCL पर कुल ₹115,948 करोड़ का कर्ज़ (Debt) था। तीसरी तिमाही (Q3) में कंपनी को ₹198 करोड़ का इंटरेस्ट एक्सपेंस (Interest Expense) भुगतना पड़ा, जबकि नौ महीनों (9M) में यह ₹6120 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, इंटरेस्ट इनकम (Interest Income) की बात करें तो Q3 में ₹439 करोड़ और नौ महीनों में ₹1346 करोड़ रही। इसके अलावा, एक्सचेंज फ्लक्चुएशन (Exchange Fluctuations) का भी असर देखा गया, जिसमें क्रूड लायबिलिटी (Crude Liability) Q3 में (₹297 करोड़) और 9M में (₹1032 करोड़) रही। नॉन-क्रूड लायबिलिटी (Other than Crude Liability) पर असर Q3 में (₹460 करोड़) और 9M में (₹1926 करोड़) दर्ज किया गया।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस: थ्रूपुट के आंकड़े
ऑपरेशनल (Operational) मोर्चे पर, IOCL ने Q3 FY25-26 में 19.4 MMT रिफाइनरी थ्रूपुट (Refinery Throughput) दर्ज किया, जो 109.7% कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) पर काम कर रही थी। नौ महीनों में थ्रूपुट 77.9 MMT रहा, जो 76.3% यूटिलाइजेशन दर्शाता है। मार्केटिंग ऑपरेशंस (Marketing Operations) के वॉल्यूम (Volume) के आंकड़े तो दिए गए हैं, लेकिन रेवेन्यू की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बड़े पैमाने पर Capex प्रोग्राम जारी
कंपनी अपनी भविष्य की ग्रोथ (Growth) के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मल्टी-बिलियन डॉलर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure - Capex) प्रोग्राम चला रही है। मुख्य प्रोजेक्ट्स में पानीपत रिफाइनरी एक्सपेंशन (Panipat Refinery Expansion) पर 91.6% काम पूरा हो चुका है और यह दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। गुजरात रिफाइनरी एक्सपेंशन (Gujarat Refinery Expansion) 85.8% प्रगति पर है और जुलाई 2025 में पूरा होने की संभावना है। बरौनी रिफाइनरी एक्सपेंशन (Barauni Refinery Expansion) 89.4% पूरा हो चुका है और अगस्त 2026 में तैयार होगा। इसके अलावा, पारादीप में PX-PTA कॉम्प्लेक्स, एक नई मुंबई-पानीपत क्रूड ऑयल पाइपलाइन, नया R&D कैंपस-II और पॉली ब्यूटाडाईन रबर प्लांट (Poly Butadiene Rubber Plant) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।
9M FY25-26 के दौरान रिफाइनरीज में ₹12261 करोड़, पाइपलाइन्स में ₹1345 करोड़, मार्केटिंग में ₹1374 करोड़, पेट्रोकेमिकल्स (Petchem) में ₹2183 करोड़ और E&P में ₹223 करोड़ का Capex किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए कुल Capex टारगेट ₹24336 करोड़ है, जिसमें ₹34701 करोड़ जेवी/सब्सिडियरीज (JVs/Subsidiaries) में निवेश किए गए हैं।
जोखिम और आगे की राह: अस्पष्टता के बीच
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम प्रॉफिटेबिलिटी और रेवेन्यू पर स्पष्टता की कमी है, जिससे कंपनी के असल वित्तीय प्रदर्शन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) का आकलन करना मुश्किल हो रहा है। ₹1.15 लाख करोड़ से ज्यादा का भारी भरकम कर्ज़ (Debt) भी वित्तीय दबाव बढ़ा रहा है, खासकर लगातार हो रहे इंटरेस्ट एक्सपेंस के साथ। हालांकि, बड़े Capex प्लान भविष्य की ग्रोथ और विस्तार के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दिखाते हैं, लेकिन मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) या कॉनकॉल (Concall) कमेंट्री न होने से बाजार इन बड़े निवेशों के रणनीतिक प्रभाव और रिटर्न (Return) की समय-सीमा पर अटकलें लगा रहा है।