सरकारी तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL ने साल 2027 के लिए अमेरिका से 27.5 लाख मीट्रिक टन LPG आयात करने का संयुक्त टेंडर जारी किया है। यह कदम देश की 90% आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
सरकारी तेल कंपनियों Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) ने साल 2027 के लिए अमेरिका से 27.5 लाख मीट्रिक टन LPG मंगाने के लिए हाथ मिलाया है। इस टेंडर के लिए बोलियां 22 अक्टूबर तक खुली रहेंगी, जो भारत की कुकिंग गैस सोर्सिंग स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और अपनी खपत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। डेटा के अनुसार, 2025 में कुल आयात का 90% हिस्सा केवल मिडिल ईस्ट देशों से आया। इस अत्यधिक निर्भरता के कारण सप्लाई चेन में भू-राजनीतिक तनाव का खतरा हमेशा बना रहता है। अब तक सप्लाई बाधित होने पर सरकार को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को घरेलू कुकिंग गैस में बदलना पड़ता था, जिसे अब बदलने की तैयारी है।
टेंडर की मुख्य बातें
इस योजना के तहत हर महीने चार VLGC (Very Large Gas Carriers) कार्गो डिलीवर्ड आधार पर मंगाए जाएंगे, जिसमें प्रत्येक 46,000 टन का प्रोपेन-ब्यूटेन मिश्रण होगा। इसके साथ ही, एक 45,000 टन का कार्गो FOB (Free-on-board) आधार पर हर महीने मंगाया जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
हालांकि यह कदम सप्लाई सिक्योरिटी के लिए अच्छा है, लेकिन अमेरिका से आने वाले माल की शिपिंग दूरी ज्यादा है। इसका मतलब है कि माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है। चूंकि इन कंपनियों के मार्जिन सरकारी रेगुलेशन और सब्सिडी पर टिके होते हैं, ऐसे में आयात लागत में कोई भी उछाल इनके बॉटम लाइन पर दबाव डाल सकता है। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि कंपनियां इन कॉन्ट्रैक्ट्स में फाइनल प्राइसिंग कैसे सेट करती हैं और बढ़ती ग्लोबल एनर्जी वोलैटिलिटी के बीच अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं।
