Indian Oil Corporation: माल ढुलाई के भारी खर्च से परेशान IOC, अब खुद का 'टैंकर फ्लीट' बनाने की तैयारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Oil Corporation: माल ढुलाई के भारी खर्च से परेशान IOC, अब खुद का 'टैंकर फ्लीट' बनाने की तैयारी

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के चेयरमैन ए.एस. साहनी ने चेतावनी दी है कि शिपिंग लागत बढ़ने से डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल खरीदने का फायदा कम हो रहा है। खर्चों को काबू में रखने के लिए कंपनी अब बड़े राष्ट्रीय टैंकर फ्लीट और स्टोरेज क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

मुनाफे पर क्यों पड़ रही है मार?

IOC के चेयरमैन ए.एस. साहनी ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ते में क्रूड ऑयल लाने का जो फायदा कंपनी को मिलता था, वह अब बढ़ती शिपिंग दरों (Freight Rates) के कारण कम होता जा रहा है। रूस से ज्यादा तेल आयात करने के कारण लॉजिस्टिक जटिलताएं बढ़ी हैं और दूरी भी अधिक हो गई है। ऐसे में जब ग्लोबल टैंकर फीस में उतार-चढ़ाव आता है, तो रिफाइनर्स के लिए क्रूड की 'लैंडेड कॉस्ट' बढ़ जाती है। इसका सीधा असर कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर पड़ता है, जो किसी भी रिफाइनरी कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होता है।

क्यों जरूरी है अपना टैंकर फ्लीट?

फिलहाल, भारतीय रिफाइनर्स तेल मंगवाने के लिए थर्ड-पार्टी शिपिंग कंपनियों पर काफी निर्भर हैं। IOC अब एक ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे कंपनी अपनी खुद की या राष्ट्रीय टैंकर फ्लीट विकसित कर सके। इससे न केवल लॉजिस्टिक खर्चों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में होने वाली ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों से भी बचाव हो सकेगा।

सेक्टर पर क्या होगा असर?

यह चुनौती केवल IOC तक सीमित नहीं है। भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियां भी इसी तरह के दबाव से जूझ रही हैं। जब तक ये कंपनियां अपने खर्चों को मैनेज नहीं कर लेतीं या उन्हें मार्केट में पास नहीं करतीं, तब तक उनके बॉटम लाइन पर दबाव बना रह सकता है।

निवेशकों के लिए आने वाले समय में दो चीजें अहम होंगी: पहला, क्या कंपनी लॉजिस्टिक्स में बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करने वाली है, और दूसरा, अगली तिमाही के नतीजों में फ्रेट कॉस्ट का मुनाफे पर कितना असर दिखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.