रिकॉर्ड मुनाफे का राज: सरकारी मुआवजा
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 78% बढ़कर ₹14,458 करोड़ हो गया। यह बड़ी बढ़ोतरी मुख्यतः LPG की कीमतों में हुई अंडर-रिकवरी के एवज में सरकार से प्राप्त ₹6,035.85 करोड़ की राशि के कारण संभव हुई है।
पूरे वित्त वर्ष 2026 (FY26) की बात करें तो, IOC का नेट प्रॉफिट 210% की जबरदस्त छलांग लगाते हुए ₹42,096.26 करोड़ पर पहुँच गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹13,597.84 करोड़ था। ऑपरेशन्स से होने वाली रेवेन्यू में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, जो तिमाही में लगभग 7% बढ़कर ₹2,36,899.33 करोड़ और पूरे साल में 4.9% बढ़कर ₹9,01,452.70 करोड़ रही।
डिविडेंड की घोषणा और इन्वेंट्री पर भू-राजनीतिक जोखिम
कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों को ₹1.25 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है, जिसे मंजूरी मिलने पर बांटा जाएगा।
हालांकि, इन शानदार नतीजों के बीच कंपनी के लिए कुछ परिचालन संबंधी जोखिम भी बने हुए हैं। 31 मार्च 2026 तक, IOC के पास अरब/फारस की खाड़ी (Persian Gulf) क्षेत्र में कच्चे तेल (Crude Oil) के तीन शिपमेंट थे, जिनकी कीमत ₹5,411.83 करोड़ थी। इसके अलावा ₹618.64 करोड़ के LPG के पांच शिपमेंट भी उसी क्षेत्र में थे। यह इन्वेंट्री (Inventory) मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण सप्लाई में अनिश्चितता और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रखती है। कंपनी ने नॉन-फॉसिल और ऑफ-गैस आधारित ईंधन उत्पादन सुविधाओं पर ₹1,212.42 करोड़ का इंपेयरमेंट लॉस (Impairment Loss) भी दर्ज किया है।
वैल्यूएशन, शेयर प्रदर्शन और विश्लेषकों की राय
मध्य-मई 2026 तक, IOC का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹1.86 ट्रिलियन था। कंपनी का पिछला बारह महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 5.07-5.55 के आसपास है, जो सेक्टर के औसत 16.17 से काफी कम है, जिससे यह एक वैल्यू स्टॉक (Value Stock) के तौर पर दिख रही है। इसके प्रतिस्पर्धी Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) भी इसी तरह के कम P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं।
इसके बावजूद, IOC के शेयर का प्रदर्शन पिछले एक साल में बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है और यह अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों (Analysts) का नजरिया फिलहाल सकारात्मक दिख रहा है, जिसमें 'Buy' की आम सहमति और ₹166.94 का औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट (Price Target) मौजूदा स्तरों से ऊपर जाने की उम्मीद जताता है।
लेकिन, हाल के मुनाफे की निरंतरता कई बाहरी कारकों पर निर्भर करती है। सरकार द्वारा अंडर-रिकवरी की भरपाई पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है, वहीं भू-राजनीतिक अस्थिरता और एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) जैसे मुद्दे भी ऑपरेशनल और स्ट्रेटेजिक मुश्किलें पैदा करते हैं।