नतीजों का दिन: IGL और MGL की परफॉर्मेंस पर नजर
इंड्राप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और महानगर गैस लिमिटेड (MGL) दोनों कंपनियां आज, 7 मई को अपने Q4 FY26 के नतीजे पेश करने वाली हैं। पिछले तिमाही (Q3) में इन दोनों कंपनियों के मुनाफे (Profit) के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला था, जिसने निवेशकों को चौंका दिया था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह ट्रेंड जारी रहेगा या इसमें कोई बदलाव आएगा।
Q3 में क्या हुआ था?
Q3 में, IGL ने अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में जबरदस्त 25% की बढ़ोतरी दर्ज की थी। वहीं, दूसरी ओर MGL के प्रॉफिट में 9.8% की गिरावट आई थी, और यह ₹201.1 करोड़ पर आ गया था। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस दौरान रेवेन्यू (Revenue) में कुछ बढ़त दिखाई थी। अब देखना यह होगा कि नए नतीजों में IGL अपनी इस रफ्तार को बनाए रख पाती है या MGL अपने मुनाफे को फिर से पटरी पर ला पाती है।
वैल्यूएशन और ब्रोकरेज की राय
बाजार विश्लेषक (Analysts) इन नतीजों को बारीकी से देखेंगे। फिलहाल, IGL का शेयर लगभग ₹166.05 के आसपास और MGL का शेयर ₹1,133.85 के आसपास ट्रेड कर रहा है। वैल्यूएशन की बात करें तो, गुजरात गैस का P/E रेश्यो करीब 23.19x है, जबकि MGL का P/E रेश्यो 11.78x और IGL का 14.04x है। इससे लगता है कि MGL का शेयर सस्ता हो सकता है। पिछले एक साल में MGL का मुनाफा 8.9% गिरा है, जो इंडस्ट्री एवरेज से कम है। IGL का P/E इंडस्ट्री एवरेज 16.1x के करीब है। इन सबके बावजूद, ज़्यादातर एनालिस्ट्स MGL को 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और इसमें अच्छी खासी अपसाइड देख रहे हैं। IGL का शेयर मार्च में अपने 52-वीक लो ₹158.3 के करीब पहुंचा था, भले ही उसके फंडामेंटल्स मजबूत हैं और उस पर कोई कर्ज नहीं है।
सेक्टर का भविष्य और रिस्क फैक्टर
भारत का सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और अगले 10 सालों (2025-2035) में इसके 6.0% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। यह शहरीकरण और प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ाने की सरकारी योजनाओं के कारण संभव होगा। गैस की कीमतें हर महीने क्रूड ऑयल के आधार पर तय होती हैं, लेकिन बढ़ते क्रूड ऑयल की कीमतें लागत बढ़ा सकती हैं।
MGL के लिए कुछ चिंताएं भी हैं। Q3 में रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद प्रॉफिट में गिरावट मार्जिन पर दबाव या ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने का संकेत हो सकती है। MGL पर ₹54.33 करोड़ का संभावित जीएसटी (GST) लायबिलिटी का भी मामला है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कई जोखिम हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण कतर से एलएनजी (LNG) इम्पोर्ट में दिक्कतें आ सकती हैं। इससे CGD सेल्स वॉल्यूम में 8-10% तक की कमी आ सकती है, जिसका असर मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्राहकों पर पड़ेगा। ब्रेंट क्रूड और स्पॉट एलएनजी की बढ़ती कीमतें भी सेक्टर की प्रॉफिट मार्जिन पर भारी पड़ सकती हैं।
आगे क्या उम्मीदें?
लंबे समय में CGD सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि MGL के Q4 FY26 के नतीजे 6.6% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दिखा सकते हैं। IGL की ओर से वॉल्यूम ग्रोथ और स्टेबल मार्जिन पर फोकस रहने की उम्मीद है, जिसमें कम ट्रांसमिशन टैरिफ और टैक्स बेनिफिट्स का सहारा मिल सकता है। निवेशक देखेंगे कि कंपनियां कॉस्ट प्रेशर और सप्लाई इश्यूज को कैसे मैनेज करती हैं, जबकि सेक्टर की ग्रोथ का फायदा उठाती हैं।
