Indraprastha Gas Limited (IGL) के दूसरी तिमाही के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **93.5%** गिरकर महज **₹24.38 करोड़** रह गया है। हालांकि कंपनी ने **10.06 mmscmd** की रिकॉर्ड सेल्स वॉल्यूम हासिल की है, लेकिन गैस की ऊंची खरीद लागत के कारण मार्जिन पर भारी दबाव है।
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही IGL के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 93.5% गिरकर ₹24.38 करोड़ पर आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी का रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹5,999.13 करोड़ रहा, लेकिन मुनाफा कमाने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई। कंपनी ने भले ही 10 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd) की ऐतिहासिक बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया हो, पर यह वॉल्यूम ग्रोथ बॉटम लाइन को बचाने के लिए नाकाफी साबित हुई।
क्यों घटा मुनाफा?
मुनाफे में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह नेचुरल गैस खरीदने की बढ़ती लागत है। IGL जैसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कच्चे माल की कीमतें अचानक बढ़ गई थीं और कंपनी इन खर्चों को पूरी तरह से ग्राहकों पर नहीं डाल पाई। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹372.51 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था, जिसके मुकाबले मौजूदा नतीजे चिंताजनक हैं।
वॉल्यूम ग्रोथ बनाम प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौती
दिल्ली-एनसीआर समेत 34 जिलों में अपना नेटवर्क चलाने वाली IGL ने ऑपरेशनल स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी की CNG वॉल्यूम में 9% और पाइप नेचुरल गैस (PNG) सेल्स में 8% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह नतीजे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस के उन रिस्क को दिखाते हैं, जहां इनपुट कॉस्ट बढ़ने और रिटेल प्राइसिंग पर दबाव होने से मार्जिन सीधे प्रभावित होते हैं।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी गैस सोर्सिंग मिक्स को कैसे मैनेज करती है और सरकार की नई गैस एलोकेशन नीतियों का इस पर क्या असर पड़ता है। आने वाले समय में कंपनी की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी और मैनेजमेंट की कमेंट्री तय करेगी कि क्या वे इस लागत के दबाव से बाहर निकल पाएंगे या नहीं।
