देश में बिजली की रिकॉर्ड मांग **269 GW** तक पहुंचने के कारण इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर बिजली की कीमतें सरकारी सीमा **₹20** प्रति यूनिट के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
बिजली बाजार में तनाव
देश का पावर सेक्टर इन दिनों भारी दबाव से गुजर रहा है। 6 सितंबर से 17 सितंबर के बीच IEX पर बिजली की कीमतें लगातार ₹20 प्रति यूनिट के रेगुलेटरी कैप को छू रही हैं। इसका मुख्य कारण 10 सितंबर को दर्ज की गई 269 GW की रिकॉर्ड बिजली मांग है, जो सामान्य अनुमानों से कहीं ज्यादा है।
मांग और आपूर्ति का संकट
मांग बढ़ने के पीछे गर्मी के कारण बढ़ते कूलिंग लोड और सिंचाई की जरूरतें प्रमुख हैं। वहीं, दूसरी तरफ सप्लाई साइड पर 15% बारिश की कमी ने हाइड्रो पावर प्लांटों के उत्पादन को प्रभावित किया है। इसके अलावा, थर्मल पावर प्लांट कोयले की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिससे बाजार में बिजली की कुल उपलब्धता सीमित हो गई है।
डिस्कॉम्स पर वित्तीय बोझ
सितंबर के पहले 17 दिनों में बिजली की औसत बाजार कीमत ₹7.83 प्रति यूनिट रही है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। यह स्थिति सरकारी डिस्कॉम्स (Discoms) के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि महंगी बिजली खरीदने से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है, जिसका असर पावर जनरेटर्स के भुगतान पर भी पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
इस स्थिति में CERC द्वारा तय ₹20 का प्राइस कैप बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को तो रोकता है, लेकिन जनरेटर्स की कमाई की संभावना को सीमित कर देता है। अब निवेशकों की नजरें मानसून की प्रगति और कोयले की सप्लाई पर टिकी हैं, क्योंकि यही फैक्टर आगे चलकर बिजली सेक्टर की स्थिरता तय करेंगे।
